बाबाजी, प्लीज़ हाईकोर्ट जाइए: सुप्रीम कोर्ट ने गंगा को सीवेज से बचाने की मांग पर 'बाबा खतरनाक' से कहा

Update: 2026-02-18 15:00 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गंगा नदी और मणिकर्णिका घाट के आसपास सीवेज वेस्ट डिस्पोजल पर रोक लगाने के लिए निर्देश मांगने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अधिकारियों या हाई कोर्ट से संपर्क करने की अनुमति दी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच 'बाबा खतरनाक' नाम के साधु की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो खुद पेश हुए।

याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत बिना ट्रीटमेंट वाले कच्चे इंसानी मल और सीवेज के रियल-टाइम डिस्चार्ज से जुड़ी थी, जिसके कारण मणिकर्णिका क्षेत्र, मणिकर्णिका तीर्थ, मणिकर्णिका महाश्मशान और गंगा नदी के आस-पास के इलाकों में सफाई फेल हो गई।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि गंगा द्वार-मणिकर्णिका इंटरफेस पर बिना ट्रीटमेंट वाला इंसानी मल और सीवेज गंगा नदी में रियल-टाइम में मिलता है और भक्त उसी पानी को पवित्र गंगाजल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और काशी विश्वनाथ की पूजा में चढ़ाते हैं। इससे पब्लिक हेल्थ और कल्चरल बचाव को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।

शुरू में बेंच ने यह कहते हुए अर्जी पर सुनवाई करने से मना किया कि यह मामला पॉलिसी के दायरे में आएगा।

CJI कांत ने कहा,

"बाबाजी, प्लीज़ हाईकोर्ट जाइए।"

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने और ज़रूरत पड़ने पर हाई कोर्ट जाने की आज़ादी दी।

ऑर्डर में कहा गया:

"याचिकाकर्ता ने संविधान के आर्टिकल 32 के तहत फाइल की गई इस रिट याचिका में यह निर्देश मांगा कि कोई भी बिना ट्रीटमेंट वाला सीवेज, कच्चा इंसानी कचरा, ओवरफ्लो, सीपेज, बैक फ्लो या सैनिटेशन डिस्चार्ज, चाहे डायरेक्ट हो या इनडायरेक्ट, गंगा नदी में न जाए। हमारी राय में याचिकाकर्ता को सबसे पहले तय या कानूनी अथॉरिटीज़ के पास जाना चाहिए, जब उसे किसी खास मसले का हल न मिले तो वह अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट में जा सकता है।"

Case Details : BADARAVADA VENUGOPAL @ BABA KHATARNAK v. UNION OF INDIA & ORS.| Writ Petition(s)(Civil) No(s).171/2026

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