ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी पर लिखी किताब के अंश पोस्ट करने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वकील के ख़िलाफ़ मानहानि केस पर लगाई रोक

Update: 2026-03-13 13:09 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने वकील कौस्तव बागची की याचिका पर नोटिस जारी किया और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। बागची ने अपनी याचिका में अपने ख़िलाफ़ दायर मानहानि की शिकायत को रद्द करने की मांग की थी। यह शिकायत तब दायर की गई, जब उन्होंने एक किताब का अंश पोस्ट किया, जिसमें कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी के बारे में कुछ टिप्पणियां की गई थीं।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 31 अक्टूबर, 2025 के आदेश के ख़िलाफ़ दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर यह अंतरिम आदेश पारित किया।

सीनियर वकील सिद्धार्थ दवे (याचिकाकर्ता की ओर से) ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के उस पुनर्विचार आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करने की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' (BNS) की धारा 356(2) के तहत मानहानि के अपराध का संज्ञान लिया था।

याचिकाकर्ता कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील हैं। मई 2025 में उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर दीपक कुमार घोष द्वारा लिखी गई एक किताब का अंश पोस्ट किया था। कहा जाता है कि इस किताब में, जो 2015 में प्रकाशित हुई, लेखक ने मुख्यमंत्री बनर्जी की निजी ज़िंदगी पर टिप्पणियां की थीं।

दवे ने खंडपीठ के सामने यह बात रखी कि उस किताब पर कभी रोक नहीं लगाई गई और वह अभी भी बाज़ार में उपलब्ध है। इसलिए याचिकाकर्ता ने उस किताब का सिर्फ़ एक अंश ही अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई कथित अपराध किसी 'लोक पदाधिकारी' (Public Functionary)—जैसे कि मुख्यमंत्री—के ख़िलाफ़ किया जाता है, तो उसका संज्ञान तभी लिया जा सकता है, जब वह आचरण उस पदाधिकारी के "सार्वजनिक कार्यों" (Public Functions) के निर्वहन से जुड़ा हो; ऐसा 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' (BNSS) की धारा 222 के अनुसार है।

लेखक ने यह भी बताया था कि उन्होंने 30 अप्रैल, 2012 को मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर कुछ जानकारी मांगी थी।

बागची ने इस पत्र सहित किताब के कुछ हिस्सों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया और कथित तौर पर मुख्यमंत्री की निजी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ टिप्पणियां भी की थीं। इसके बाद पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने वैधानिक मंज़ूरी प्राप्त करने के उपरांत, BNSS की धारा 222(2) के तहत मंत्री को प्राप्त विशेषाधिकार का लाभ उठाते हुए एक शिकायत दर्ज की।

आवेदक को सुनवाई का अवसर देने के बाद कलकत्ता के सिटी सेशंस कोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपराध का संज्ञान लिया और समन जारी करने का आदेश दिया। इस आदेश को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह अंश शपथ ग्रहण समारोह से संबंधित है। इसलिए यह एक लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए आचरण से जुड़ा है।

Case Details: KOUSTAV BAGCHI v STATE OF WEST BENGAL|Diary No. 14612-2026

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