सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर उद्योग लिमिटेड के कर्मचारियों के बकाया चुकाने के लिए पूर्व चीफ जस्टिस को नियुक्त किया एडमिनिस्ट्रेटर
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 अप्रैल) को मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को कोर्ट प्रशासक नियुक्त किया। उन्हें जयपुर उद्योग लिमिटेड (JUL) के हज़ारों कर्मचारियों के लंबे समय से अटके बकाया और पीएफ दावों की जाँच करने और उन पर नज़र रखने का काम सौंपा गया। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह काम 31 अगस्त, 2026 तक पूरा कर लिया जाए।
कोर्ट ने आदेश दिया,
"कर्मचारियों के बकाया की जांच के लिए एक समय-सीमा के भीतर काम किया जाए ताकि चार महीने के अंदर यह देनदारी चुकाई जा सके... ज़रूरी कार्रवाई 31 अगस्त, 2026 तक पूरी कर ली जाए।"
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि कर्मचारियों का बकाया JAL और उसकी सहायक कंपनी M/s जय एग्रो इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (JAIL) की संपत्तियों को बेचकर मिलने वाली रकम से चुकाया जा सकता है।
कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि संपत्तियों को बेचने या इस्तेमाल करने के लिए कोई भी कदम उठाने से पहले, "उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाकर उनका सही मूल्यांकन किया जाना ज़रूरी है।"
कोर्ट ने कहा,
"कर्मचारियों का बकाया चुकाने और GDCL द्वारा खर्च या निवेश की गई रकम की भरपाई करने के लिए JUL/JAIL की कुछ संपत्तियों को बेचना पड़ सकता है। संपत्तियों की पहचान और उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट इस कोर्ट के सामने आने के बाद यह तय किया जाएगा कि कौन सी संपत्तियां और कैसे बेची जानी हैं।"
ये निर्देश उत्तर प्रदेश भारतीय मज़दूर संघ द्वारा दायर एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए। इस सुनवाई में कोर्ट ने JUL की राजस्थान के सवाई माधोपुर में स्थित सीमेंट यूनिट और कानपुर में स्थित जूट मिल को फिर से शुरू करने की उनकी अपील खारिज की। कोर्ट ने कहा कि लगभग चार दशकों से बंद पड़ी इन यूनिटों को फिर से शुरू करना अब मुमकिन नहीं है। हालांकि, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि कर्मचारियों को उनका लंबे समय से अटका बकाया ज़रूर मिले।
इसके अलावा, कोर्ट ने उन मज़दूरों को आदेश दिया, जो कंपनी के आवासों में रह रहे थे, कि वे अपना बकाया भुगतान मिलने की तारीख से छह महीने के अंदर उन आवासों को खाली कर दें।
Cause Title: BHARTIYA MAZDOOR SANGH, U.P. & ANR. VERSUS STATE OF U.P. & OTHERS