सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट को सिविल जज की नियुक्तियों को नोटिफ़ाई करने की इजाज़त दी

Update: 2026-02-16 16:55 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट को राज्य में ज्यूडिशियल ऑफिसर (सिविल जज) की नियुक्तियों को नोटिफ़ाई करने की इजाज़त दी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच मलिक मज़हर सुल्तान बनाम यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन केस की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वह ट्रायल कोर्ट में ज्यूडिशियल खाली जगहों को भरने के बारे में समय-समय पर कई आदेश दे रही है।

बेंच को बताया गया कि कर्नाटक सिविल जजों के लिए सिलेक्शन प्रोसेस पूरा हो गया और सिर्फ़ रिज़ल्ट घोषित करना बाकी है।

इस पर विचार करते हुए बेंच ने आदेश दिया,

"IA की इजाज़त है, हाईकोर्ट ज्यूडिशियल ऑफिसर (सिविल जज) की नियुक्ति को नोटिफ़ाई करने के लिए आज़ाद है।"

मद्रास हाईकोर्ट ने एक और अर्ज़ी दी, जिसमें कहा गया कि पिछले 5 सालों से सिर्फ़ 8 डायरेक्ट रिक्रूट हुए और डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी में 47 खाली जगहें हैं। बेंच अप्रैल के पहले हफ़्ते के लिए अर्ज़ी को लिस्ट करने पर सहमत हो गई।

फरवरी, 2025 में कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह ज्यूडिशियरी में सीधी भर्ती रोकने वाले राज्य सरकार के सर्कुलर के बावजूद 158 सिविल जजों की भर्ती का सिलेक्शन प्रोसेस आगे बढ़ाए।

पूर्व CJI संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच को तब बताया गया कि कर्नाटक सरकार ने 15 नवंबर, 2024 के अपने सर्कुलर में कर्नाटक ज्यूडिशियल सर्विस (रिक्रूटमेंट) (अमेंडमेंट) रूल्स 2024 के तहत रिज़र्वेशन में बदलाव करके सीधी भर्ती का प्रोसेस रोक दिया।

Case : MALIK MAZHAR SULTAN Versus U.P. PUBLIC SERVICE COMMISSION THROUGH ITS SECRETARY AND ORS|C.A. No. 1867/2006

Tags:    

Similar News