सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जहांगीरपुरी विध्वंस स्थगन आदेश पर सोशल मीडिया पर आलोचनात्मक टिप्पणियां: एडवोकेट ने सीजेआई रमाना को पत्र लिख कर मीडिया, सोशल मीडिया पर नियंत्रण, दिशानिर्देश जारी करने की मांग की

Update: 2022-04-28 08:24 GMT

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) एडवोकेट ने चीफ जस्टिस एन वी रमाना (CJI Ramana) को पत्र लिख कर जहांगीरपुरी विध्वंस स्थगन आदेश के बाद मीडिया और सोशल मीडिया पर नियंत्रण और दिशानिर्देश जारी करने की मांग की क्योंकि इन प्लेफॉर्म पर कोर्ट के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणियां की जा रही हैं।

याचिकाकर्ता-एडवोकेट ईलन सारस्वत ने पत्र याचिका में लिखा है,

"मीडिया और सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की जा रही है। तरह-तरह की अनुचित टिप्पणियां की जा रहा हैं। जबकि जहांगीरपुरी मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, उक्त मामले के संबंध में की गई कोई भी आलोचनात्मक टिप्पणी या बयान, जो भी हो, पूरी तरह से अनुचित है और न्यायालय की अवमानना है।"

आगे लिखा,

" 27 अप्रैल 2022 को मैंने कई ख़बरें पढ़ी, जिसमें मध्य प्रदेश में बुलडोजर द्वारा घरों को गिराने की खबरें थीं। मध्य प्रदेश के राज्य प्रशासन द्वारा उन्हें अवैध निर्माण घोषित करना, जिसमें साथ में, नई दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में पिछले सप्ताह एनडीएमसी के बुलडोजर से तोड़फोड़ अभियान पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्थगन आदेश की ख़बर भी थी।"

याचिका में यह भी लिखा गया है,

"गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से भी ऐसी ही कुछ कार्रवाई की गई थी। ऐसी खबरों पर कानूनी बिरादरी के मध्य अत्यंत चिंता और अशांति है कि भले ही ऐसी संपत्तियां अवैध हों , फिर भी ऐसी कार्रवाई पूरी तरह से गैरकानूनी है और राज्य प्रशासन न्याय की संविधान और अदालत द्वारा स्थापित प्रणाली को दरकिनार करके कानून की उचित प्रक्रिया से बच रहा है और इसे न्याय की नई बुलडोजर प्रणाली बनाने की कोशिश कर रहा है।"

एडवोकेट ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए प्रस्तुत किया कि पिछले एक हफ्ते में, मीडिया और विशेष रूप से सोशल मीडिया, जहांगीरपुरी विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तत्काल न्यायिक कार्रवाई की आलोचना करने वाले राजनेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा की गई ज़हरीली और गंदी टिप्पणियों और बयानों से भरा पड़ा है।

याचिकाकर्ता ने रमाना से प्रार्थना की कि इन परिस्थितियों में लॉर्डशिप ऐसी घटनाओं को देखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें और कानून की उचित प्रक्रिया द्वारा स्थापित प्रणाली की रक्षा करें। इसके साथ ही गैर जिम्मेदार मीडिया और सोशल मीडिया जो हमारी न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, को नियंत्रित किया जाए।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल (गुरुवार) को दंगा प्रभावित जहांगीरपुरी इलाके में उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा शुरू किए गए विध्वंस अभियान के खिलाफ यथास्थिति के आदेश को अगले आदेश तक बढ़ा दिया।

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिका में एनडीएमसी को नोटिस जारी किया और 2 सप्ताह के भीतर इसका जवाबी हलफनामा मांगा है।

पत्र याचिका की कॉपी यहां पढ़ें:



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