जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया को शनिवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दाखिले के लिए  टेस्ट- NLAT 2020 आयोजित करने की अनुमति दी है। हालांकि बेंच ने प्रशासन को परिणाम घोषित करने और दाखिले देने से रोक दिया है। अदालत ने नोटिस जारी किया है और सुनवाई 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध की है ।

बेंच NLSIU के पूर्व कुलपति, प्रो (डॉ) आर वेंकट राव और CLAT  के इच्छुक माता-पिता द्वारा N LSIU बैंगलोर को CLAT2020 से अचानक वापस हटने और अलग से NLAT  2020 परीक्षा आयोजित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में अधिवक्ता सुघोष सुब्रमण्यम और विपिन नैयर ने कहा है कि एक अलग परीक्षा आयोजित करने के लिए NLSIU के इस तरह के "एकतरफा निर्णय" से CLAT 2020 के उम्मीदवार आवेश में हैं और ये उनके मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, जिसमें मनमाने कार्यों के खिलाफ अनुच्छेद 14 के तहत राज्य से सुरक्षा का अधिकारऔर अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा और अन्य सहवर्ती अधिकारों का अधिकार शामिल है। 

यह कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य एक "अभिजात्य संस्थान" बनाना है, जो उन लोगों की मांग पूरा करता है जो परीक्षा देने में सक्षम हैं और विश्वविद्यालय द्वारा लगाई गई अन्य "बेतुकी शर्तों" को पूरा करने की लग्जरी को पूरा करते हैं।

विशेष रूप से, NLSIU ने NLAT  2020 देने के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को जारी किया है। इसमें कम से कम 1 एमबीबीएस बैंडविड्थ के साथ एक कंप्यूटर सिस्टम / लैपटॉप को अनिवार्य किया गया है।

यह दलील दी गई है कि इस तरह की स्थिति गंभीर है और आकांक्षी छात्रों पर ये एक अनुचित दायित्व है। ऐसा लगता है कि निर्णय बिना विवेक के आवेदन के और गरीबों, हाशिए वाले और कम विशेषाधिकार प्राप्त उम्मीदवारों की आकांक्षाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए लिया गया है। 

याचिका में कहा गया है, 

"मूल रूप से ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तरदाता नंबर 2 [NLSIU वीसी प्रो [डॉ ] सुधीर कृष्णस्वामी] का एकमात्र उद्देश्य उत्तरदाता नंबर 1 [NLSIU] को उत्कृष्टता के एक द्वीप से बहिष्करण के द्वीप में बदलना है।"

उन्होंने कहा है कि इस फैसले से छात्रों में भय और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है और इससे NLSU कंसोर्टियम में NLSIU की स्थिति भी गंभीर रूप से खतरे में पड़ गई है।

इस प्रकार प्रार्थना की गई है कि 3 सितंबर को जारी NLSIU प्रवेश नोटिस को रद्द कर दिया जाए और विश्वविद्यालय को केवल CLAT 2020 स्कोर के माध्यम से छात्रों को स्वीकार करने के लिए निर्देशित किया जाए।

3 सितंबर को, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंगलोर ने शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए पांच वर्षीय B.A LL.B (ऑनर्स) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए एक अलग परीक्षा आयोजित करने के अपने निर्णय की घोषणा की। 'नेशनल लॉ एप्टीट्यूड टेस्ट' (NLAT) नामक नई परीक्षा  12 सितंबर को ऑनलाइन आयोजित किए जाने के लिए प्रस्तावित है।

CLAT  के 5 उम्मीदवारों ने झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष इस फैसले को चुनौती दी है।

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