बार-बार अर्जियां दायर करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट ने आदर्श घोटाला मामले के अभियुक्त पर लगाया 25 हजार का जुर्माना

Update: 2020-09-17 09:22 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार अंतरिम जमानत याचिकाएं दायर करने के लिए आदर्श घोटाला मामले के आरोपी राज कुमार मोदी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की खंडपीठ ने मेडिकल के आधार पर अंतरिम जमानत को बढ़ाने संबंधी अर्जी खारिज करते हुए कहा कि बार-बार अर्जियां दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

मोदी को 15 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट से मां की गम्भीर बीमारी के नाम पर दो महीने की अवधि के लिए अंतरिम जमानत मिली थी। उसके बाद उसने यह कहते हुए अंतरिम जमानत को अगले छह के लिए बढ़ाने की अर्जी दायर की थी कि उसकी मां का निधन हो गया है और उसे कुछ रस्म पूरे करने हैं। उसने यह भी दलील दी कि उसकी पत्नी भी गम्भीर रूप से बीमार है। कोर्ट ने एक महीने के लिए अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने का आदेश देकर अर्जी का निपटारा कर दिया था। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि अब अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने संबंधी कोई याचिका नहीं सुनी जायेगी।

इस हिदायत के बावजूद आरोपी ने जमानत अवधि बढ़ाने के लिए एक और याचिका दायर की। इस बार उसने अपनी अर्जी में कहा कि वह अधिवृषण (एपिडिडिमाइटिस) नामक बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी में अंडकोष के पीछे के हिस्से में स्थित नली में जलन होती है। बार-बार अर्जी दायर करने को गम्भीरता से लेते हुए बेंच ने कहा:

"बार-बार अर्जियां दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है। इस कोर्ट ने पिछले आदेश में स्पष्ट तौर पर यह कहा था कि अब अंतरिम जमानत के विस्तार को लेकर कोई भी अर्जी सुनी नहीं जायेगी, लेकिन इसके बावजूद अर्जी फिर से दायर की गयी। इसमें दो राय नहीं है कि बार-बार दायर की गयी याचिकाएं/ अर्जियां भारी जुर्माने के साथ खारिज की जायें। इसलिए, हम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका खर्जी करते हैं।"

बेंच ने हालांकि कहा कि याचिकाकर्ता राज कुमार मोदी को सभी उचित मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करायी जायें।

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