चार्जशीट दाखिल किए जाने को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों की CBI जांच की मांग करने वाली याचिकाओं का निपटारा किया।

आदेश में कहा गया,

"उत्तर प्रदेश राज्य ने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की, जिसके अनुसार इस मामले में चार्जशीट दायर की गई। इसे देखते हुए हम इस रिट याचिका और इससे जुड़े अन्य मामलों का निपटारा करते हैं। साथ ही संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश देते हैं कि वे कानून के अनुसार इस मामले में आगे की कार्रवाई करें। चूंकि इसमें जनहित का पहलू शामिल है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी जाती है कि वे न्यायिक मजिस्ट्रेट की सहायता कर सकते हैं—ठीक उसी तरह, जैसे कानून किसी अपराध के पीड़ित को अदालत की मदद करने का अधिकार देता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि किसी भी पक्ष के साथ कोई पूर्वाग्रह न हो, इसलिए यह अदालत मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है।"

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इन मामलों को बंद कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी कि वे संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की उसी तरह सहायता कर सकते हैं, जैसे कानून किसी अपराध के पीड़ित को अदालत की मदद करने का अधिकार देता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने इन मामलों के गुण-दोष या आरोपों पर कोई राय नहीं दी है। गौरतलब है कि सुनवाई के एक बड़े हिस्से के दौरान ऑडियो-वीडियो बंद रहा (क्योंकि कुछ याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से पेश हुए)।

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि चोरी मुख्य रूप से चंदा गिनने के दौरान हुई थी।

उन्होंने कहा,

"जो लोग पैसे गिन रहे थे, उन्होंने ही पैसे निकाल लिए।"

सॉलिसिटर जनरल ने आगे बताया कि आरोपियों ने पैसे लेकर उसे कहीं और (जैसे कि प्रॉपर्टी में) निवेश किया था। कुछ मामलों में उन्होंने बैंक में पैसे जमा किए, जिसका पता अधिकारियों को तब चला जब उन्होंने पुरानी तारीखों (Back-Date) के रिकॉर्ड खंगाले और कर्मचारियों के बैंक अकाउंट्स की जांच की।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा,

"हमारे पास आंकड़े मौजूद हैं।"

प्रॉपर्टी के लेन-देन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सेल डीड (बिक्री विलेख) में भले ही 15 लाख रुपये की रकम दिखाई गई हो, लेकिन असल में उस प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख रुपये थी। बाकी की रकम नकद में दी गई, जो कि गबन की गई राशि से आई थी।

सॉलिसिटर जनरल (SG) ने बताया कि एक ऑडिट भी कराया गया और सभी कलाकृतियां/चढ़ावा सुरक्षित पाए गए। जब ​​CJI ने भविष्य को लेकर चिंता जताई तो SG ने आश्वासन दिया कि कुछ कदम उठाए गए।

इसके बाद CJI ने कहा कि बेंच संबंधित अदालत को आगे की कार्यवाही करने का निर्देश देगी और याचिकाकर्ताओं को अदालत की मदद करने की अनुमति देगी।

आगे कहा गया,

"हम अब अदालत को इस मामले में आगे बढ़ने का निर्देश देंगे। और हम आपको भी, जहां जरूरी हो, अदालत की मदद जारी रखने की छूट देंगे... यह केवल एक आरोपी बनाम राज्य का साधारण मामला नहीं है। इसमें जनहित का पहलू भी शामिल है। इसलिए,कानून के तहत अपराध के पीड़ितों को जैसे अदालत की मदद करने का अधिकार है, वैसे ही हम आपको भी यह अनुमति देंगे।"

संक्षेप में कहें तो इन याचिकाओं में 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की एक स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई। साथ ही, ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का व्यापक ऑडिट कराने की भी मांग की गई।

21 सितंबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को सूचित किया कि इन आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है। राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि SIT ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी। उन्होंने यह भी बताया कि दो दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी, जो कि आरोपियों के 'डिफ़ॉल्ट बेल' (Default Bail) मांगने के लिए तय 90 दिनों की समय-सीमा खत्म होने से पहले होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, SIT को मंदिर परिसर में स्थित 'पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर' (PFC) की इमारत में दान की गिनती वाले कमरे से नकदी को बिना अनुमति के हटाने या छिपाने के 105 मामले मिले। SIT ने आठ आरोपियों की पहचान की और उनके बैंक अकाउंट्स, वित्तीय लेन-देन, तथा उन चल-अचल संपत्तियों की जांच की, जिन्हें कथित तौर पर हेराफेरी की गई रकम से खरीदा गया।

23 सितंबर को अयोध्या की एक अदालत में इन सभी 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई।

Case: Narendra Kumar Goswami v. Union of India & Ors., W.P.(C) 790/2026 (and connected cases)

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: