Public Recruitment | सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को चेताया: ऑनलाइन आवेदनों में गलतियों के कारण अस्वीकृति को चुनौती देने वाले मामलों पर विचार न करें

Update: 2026-04-10 14:59 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि ऑनलाइन सिस्टम के ज़रिए होने वाली बड़े पैमाने की सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में आवेदनों या सहायक दस्तावेजों में छोटी-मोटी गलतियों के कारण भी उम्मीदवारी को वैध रूप से रद्द किया जा सकता है। अदालतों को आमतौर पर ऐसे फैसलों में दखल देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया में देरी हो सकती है और कई अन्य उम्मीदवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

भर्ती विवादों में न्यायिक दखल के व्यवस्थागत प्रभावों पर ज़ोर देते हुए जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने कहा कि आवेदन में गलतियों के कारण उम्मीदवारी रद्द होने को दी गई चुनौतियों पर आमतौर पर विचार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से भर्ती प्रक्रियाओं के समय पर पूरा होने में रुकावट आ सकती है।

आगे कहा गया,

“सरकारी भर्ती के मामलों में, जहां बड़ी संख्या में उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं, आवेदन पत्र स्कैन किए गए पात्रता दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों आदि के साथ ऑनलाइन जमा किए जाते हैं। ऐसे आवेदनों की जाँच कंप्यूटर एप्लीकेशन/सॉफ्टवेयर के ज़रिए की जाती है। इसलिए आवेदन में किसी भी गलती का नतीजा उम्मीदवारी की अस्वीकृति के रूप में निकलना तय है।”

खंडपीठ ने कहा,

“इस तरह की अस्वीकृति को दी गई चुनौती पर आमतौर पर विचार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया के तेज़ी से पूरा होने में रुकावट आ सकती है, जिससे हज़ारों-लाखों उम्मीदवारों की उम्मीदें टूट सकती हैं।”

Case : Poonam Dwivedi v State of UP and others

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