सुप्रीम कोर्ट में PIL: UP IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को बंगाल चुनावों में चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह अधिकारी "बेहद पक्षपाती" है और राजनीतिक उम्मीदवारों को धमका रहा है।
'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 20B का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने बताया कि पर्यवेक्षक का काम "चुनावों के संचालन पर नज़र रखना" होता है और उसे एक "तटस्थ संस्थागत सुरक्षा कवच" के रूप में देखा जाता है, जिसकी मौजूदगी का मकसद चुनावों के संचालन के प्रति जनता का भरोसा मज़बूत करना होता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अजय पाल शर्मा का आचरण "पर्यवेक्षक के दायित्वों का घोर उल्लंघन है।"
इस याचिका में कोर्ट से उचित निर्देश देने की मांग की गई, ताकि इस नियुक्ति को रद्द किया जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि चुनाव पर्यवेक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय स्वतंत्र और निष्पक्ष बने रहें।
यह याचिका मंगलवार रात आदित्य दास नाम के एक व्यक्ति ने दायर की।
बता दें, इससे दो दिन पहले BJP की पश्चिम बंगाल इकाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें कहा गया था कि "UP पुलिस के 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' और 'सिंघम' कहे जाने वाले अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना का पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है," और उन्होंने TMC उम्मीदवार जहांगीर अली के परिवार वालों को "कड़ी चेतावनी" दी। अधिकारी द्वारा चेतावनी देते हुए बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए।
तृणमूल कांग्रेस ने भी इस अधिकारी की नियुक्ति का विरोध किया।
हालांकि, मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने शर्मा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया था। कोर्ट ने कहा कि वह चुनाव की चल रही प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
Case : Aditya Das v. Election Commission | Diary No. 26135/2026