पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट बनाएगा प्रोटोकॉल, प्रदर्शनकारियों पर प्रयोग की वैधता और सीमाओं पर होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करेगा।
कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और दिल्ली में 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुए दो प्रदर्शनकारियों को मुआवजा देने की मांग की गई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी।
इससे पहले भी कोर्ट ने संकेत दिया था कि पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले नियमों और प्रावधानों की वैधता की जांच आवश्यक है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने दलील दी कि दिल्ली पुलिस के पास ऐसा कोई स्थायी आदेश या नियम नहीं है जो नागरिकों के खिलाफ पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देता हो।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1967 से अब तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया, जिसमें पेलेट गन का उल्लेख हो। उनके अनुसार इसका प्रयोग पहली बार वर्ष 2010 में जम्मू-कश्मीर में हुआ था और बाद में 2016 में भी इसका इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2011 में केंद्र सरकार के एक उच्चस्तरीय कार्यबल ने एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की थी तथा 2016 में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने रिपोर्ट दी थी लेकिन वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है।
वृंदा ग्रोवर ने कहा कि याचिका का उद्देश्य पुलिस को आत्मरक्षा के साधनों से वंचित करना नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्वभाव से अत्यधिक खतरनाक हथियार का प्रयोग नागरिकों के खिलाफ न हो।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा,
"हम केंद्र सरकार का हलफनामा मंगाएंगे और विशेषज्ञों की राय तथा आपकी सहायता से यह तय करेंगे कि पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। यदि किया जा सकता है तो किन परिस्थितियों में और किस प्रकार किया जाना चाहिए, इसके लिए हम एक प्रोटोकॉल तय करेंगे।"
कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संबंध में अपना पक्ष हलफनामे के माध्यम से रखने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ होगी।
यह याचिका पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने दायर की।
याचिका में कहा गया कि 20 जुलाई को परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स ने पंप-एक्शन गन से पेलेट दागे, जिससे प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी सहित कई लोग घायल हो गए।
याचिका के अनुसार दोनों घायलों को तत्काल लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनके शरीर में धंसे पेलेट निकालने के लिए शल्य चिकित्सा करनी पड़ी। प्रशांत कुमार सिंह ने दावा किया कि अस्पताल में उन्हें पेलेट से घायल एक और व्यक्ति भी मिला था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पैलेट गन में प्रयुक्त कारतूस से एक साथ 250 से 400 तक धातु के छोटे-छोटे छर्रे निकलते हैं, जो व्यापक क्षेत्र में फैलकर लोगों की आंखों और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी कारण उनका तर्क है कि ऐसे हथियार का इस्तेमाल नागरिकों की भीड़ पर नहीं किया जाना चाहिए।