भारत में 50 प्रतिशत से ज़्यादा वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी

Update: 2025-10-31 04:23 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने यह जानकर हैरानी जताई कि भारत में सड़कों पर चलने वाले 50 प्रतिशत से ज़्यादा वाहनों का बीमा नहीं है।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को एक बीमा कंपनी द्वारा दी गई चुनौती पर विचार कर रही थी, जिसमें कंपनी को दावेदारों को ब्याज सहित लगभग 10 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया। दावेदारों ने 1996 में एक दुर्घटना में अपने परिवार के सदस्य को खो दिया।

जजों ने 22 बीमा कंपनियों, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सामान्य बीमा परिषद के महाप्रबंधकों के साथ बातचीत की, जब वरिष्ठ अधिवक्ता जॉय बसु (प्रतिवादियों की ओर से) ने उन्हें बताया कि भारत में लगभग 50 प्रतिशत वाहनों का आज की तारीख में बीमा नहीं है।

जस्टिस करोल ने कहा,

"हे भगवान! 50 प्रतिशत?"

बसु ने पुष्टि की कि 50 प्रतिशत से ज़्यादा वाहनों का बीमा नहीं है। सुझाव दिया कि खंडपीठ इस स्थिति को सुधारने के लिए कठोर कदम उठाने के निर्देश जारी करने पर विचार कर सकती है।

जस्टिस करोल ने जवाब दिया,

"यह एक अच्छी बात है। [उपाय] सुझाएं... हम निर्देश जारी करेंगे..."।

जज ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि चालान न चुकाने पर वाहनों को ज़ब्त करने जैसी कोई व्यवस्था हो सकती है।

इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट मीनाक्षी मिधा ने सुझाव दिया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय प्रासंगिक पक्ष हो सकता है। तदनुसार, खंडपीठ ने मंत्रालय को पक्षकार बनाया और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से सहायता मांगी।

Case Title: NATIONAL INSURANCE COMPANY LIMITED Versus SMT. THUNGALA DHANA LAXMI AND ORS., SLP(C) No. 8563/2025

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