NEET-SS : सभी खाली सीटों को राज्य के पास ही रखने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स, किया यह आग्रह

Update: 2026-08-04 05:34 GMT

तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई के आदेश में बदलाव की मांग करते हुए याचिका दायर की। इस आदेश में कहा गया कि अगर काउंसलिंग के दूसरे दौर के बाद NEET-SS क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम किया जाता है, तो खाली सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों में से केवल 50% ही राज्य को वापस की जाएंगी। एसोसिएशन ने मांग की कि बाकी सभी खाली सीटें तमिलनाडु को वापस मिलनी चाहिए ताकि उन्हें योग्य इन-सर्विस उम्मीदवारों को आवंटित किया जा सके।

यह याचिका उस आदेश में बदलाव की मांग करती है, जिसमें कहा गया कि अगर राज्य काउंसलिंग के दूसरे दौर के बाद 151 सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को भरने के लिए क्वालिफाइंग प्रतिशत कम करने का फैसला करता है, तो उनमें से 50% सीटें डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) को दी जानी चाहिए।

यह याचिका तमिलनाडु में इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 151 खाली सुपर स्पेशियलिटी सीटों से जुड़ी लंबित रिट याचिका में दायर की गई। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, ये सीटें 7 नवंबर, 2020 के G.O. Ms. No. 462 के तहत इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए राज्य के 50% आरक्षण का हिस्सा हैं। इस नीति की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट ने 'तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2021)' मामले में बरकरार रखा था।

28 जुलाई को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग के दूसरे दौर के लिए 29 जुलाई तक ऐसी 151 सीटों को DGHS को वापस करने का आदेश दिया। इसमें कहा गया कि काउंसलिंग मौजूदा क्वालिफाइंग परसेंटाइल पर होनी चाहिए। हालांकि, अगर दूसरे दौर के बाद क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम करने का फैसला किया जाता है तो बाकी खाली सीटों में से 50% राज्य को वापस कर दी जाएंगी, जबकि बाकी सीटें DGHS के पास रहेंगी।

एसोसिएशन ने एक अंतरिम याचिका दायर कर कहा कि ये 151 सीटें पूरी तरह से राज्य के इन-सर्विस कोटे की हैं। इसमें कहा गया है कि DGHS को ऐसी सीटें केवल 'एन. कार्तिकेयन और अन्य बनाम तमिलनाडु राज्य' मामले में परिकल्पित एक अस्थायी व्यवस्था के तहत मिलती हैं, ताकि उन सीटों की बर्बादी को रोका जा सके, जिनके लिए कोई योग्य इन-सर्विस उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है। हालांकि, DGHS को इन-सर्विस सीटों पर कोई अधिकार, मालिकाना हक या दावा नहीं मिलता। कई उदाहरण दिए गए, जैसे कि 2024-25 के एकेडमिक सेशन में ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद बची हुई सभी 58 सीटें राज्य को वापस कर दी गईं।

एप्लीकेशन में कहा गया,

"पैराग्राफ 4 में दिया गया निर्देश, जिसके तहत DGHS खाली सीटों का 50% हिस्सा अपने पास रखता है, उस तय और एक जैसी प्रक्रिया से अलग है जो इस काउंसलिंग सिस्टम के शुरू होने के बाद से सभी सालों में अपनाई जाती रही है।"

एक सीमित मांग के तौर पर यह कहा गया कि पैराग्राफ 4 के आदेश में बदलाव किया जाए और यह निर्देश दिया जाए कि काउंसलिंग उसी परसेंटाइल पर हो। साथ ही, अगर काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद परसेंटाइल कम करने का फैसला लिया जाता है तो बची हुई सभी खाली सीटें पूरी तरह से तमिलनाडु राज्य को वापस कर दी जाएं, ताकि उन्हें 2020 के G.O. के अनुसार योग्य इन-सर्विस कैंडिडेट्स से भरा जा सके।

उल्लेखनीय है कि 2022 से सुप्रीम कोर्ट ने SS सीटों के लिए राज्य को 50% इन-सर्विस कोटा की इजाज़त दी। जून में कोर्ट ने आदेश दिया कि 151 खाली SS सीटों को ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट के ज़रिए भरा जा सकता है। इस आदेश के बाद तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (और अन्य) ने यह एप्लीकेशन दायर की। इसमें राज्य के कॉलेजों में खाली पड़ी 151 SS सीटों को ऑल इंडिया कोटा को सौंपने से राज्य को रोकने की मांग की गई।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की कि अगर ऑल इंडिया काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद परसेंटाइल 50% से कम किया जाता है तो तमिलनाडु के इन-सर्विस कैंडिडेट्स को तीसरे राउंड या मॉप-अप राउंड में उन 151 सीटों के लिए मुकाबला करने की इजाज़त दी जाए।

Case Details: TAMIL NADU MEDICAL OFFICERS ASSOCIATION & ANR v UOI|WRIT PETITION (CIVIL) NO. 771 OF 2026

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