सुप्रीम कोर्ट ने PMLA मामले में अल-फलाह चेयरमैन को कैंसर पीड़ित पत्नी के साथ रहने के लिए 5 दिन की पैरोल दी
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को पांच दिन की पैरोल दी। वह अल-फलाह ग्रुप के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में हिरासत में हैं। उन्हें यह राहत इसलिए दी गई ताकि वे अपनी पत्नी के साथ रह सकें, जो स्टेज-IV कैंसर से पीड़ित हैं।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने आदेश दिया कि सिद्दीकी को 18 सितंबर से पैरोल पर रिहा किया जाए और वह 23 सितंबर को शाम 4.30 बजे तक जेल वापस लौट आएं।
कोर्ट ने माना कि सिद्दीकी की पत्नी का स्टेज-IV कैंसर का मामला विवादित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की यह टिप्पणी कि परिवार के अन्य सदस्य उनकी देखभाल कर सकते हैं, पैरोल देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।
कोर्ट ने कहा,
"हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि अपीलकर्ता की पत्नी की बीमारी—जो स्टेज IV कैंसर की मरीज हैं—विवादित नहीं है। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी कि परिवार के अन्य लोग उनकी देखभाल कर सकते हैं, पैरोल देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती, खासकर पत्नी की बीमारी को देखते हुए। इस मामले को देखते हुए हम 18 सितंबर, 2026 से पांच दिनों की पैरोल देने का निर्णय लेते हैं। साथ ही एस्कॉर्ट (सुरक्षाकर्मी) की व्यवस्था भी होगी जिसका खर्च अपीलकर्ता उठाएगा।"
सिद्दीकी पर मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में मुकदमा चल रहा है। अल-फलाह ग्रुप के खिलाफ ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो FIR के बाद शुरू हुई। इन FIR में आरोप लगाया गया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने गैर-कानूनी फायदे के लिए छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को गुमराह करने के मकसद से NAAC एक्रेडिटेशन और UGC मान्यता के बारे में झूठे और भ्रामक दावे किए।
नवंबर 2025 में लाल किले में हुए धमाके की जांच के दौरान भी यूनिवर्सिटी जांच के दायरे में आई थी। यूनिवर्सिटी से जुड़े दो डॉक्टरों, मुज़म्मिल अहमद गनाई और शाहीन सईद, को NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया। यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल से जुड़े एक और डॉक्टर, उमर-उन-नबी पर आरोप है कि वही वह सुसाइड बॉम्बर था जिसने लाल किले के बाहर धमाका करने वाली विस्फोटक से भरी कार चलाई।
ED ने पिछले साल नवंबर में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसने सिद्दीकी और उसके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (मुकदमा चलाने की शिकायत) दायर की। 16 जनवरी को एजेंसी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की ज़मीन और इमारतें अटैच कर लीं। अटैच की गई प्रॉपर्टी में फरीदाबाद के धौज इलाके में 54 एकड़ ज़मीन और इमारतें शामिल हैं।
सिद्दीकी ने BNSS, 2023 की धारा 483 और PMLA की धारा 45 के तहत छह हफ़्ते की अंतरिम ज़मानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। उसने अपनी पत्नी की मेडिकल कंडीशन का हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने अंतरिम ज़मानत देने से इनकार किया और कहा कि उसकी पत्नी की रिपोर्ट से किसी आसन्न इमरजेंसी या गंभीर स्थिति का पता नहीं चलता। कोर्ट को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि सिद्दीकी की मौजूदगी चिकित्सकीय रूप से ज़रूरी थी।
हाईकोर्ट ने परिवार के अन्य सदस्यों की उपलब्धता पर भी विचार किया। सिद्दीकी के वकील ने बताया कि उसके माता-पिता और ससुर का निधन हो चुका है, सास 75 साल से ज़्यादा उम्र की हैं और कई बीमारियों से जूझ रही हैं, और उसके तीन बच्चे UAE में रहते हैं। हालांकि, ED ने कहा कि परिवार के कई वयस्क सदस्य पास में ही रहते हैं और वे उसकी पत्नी की मदद कर सकते हैं।
आखिरकार हाईकोर्ट ने कहा कि किसी इमरजेंसी या असाधारण परिस्थिति के बिना, केवल मानवीय आधार पर ज़मानत से जुड़े कानूनी नियमों में ढील नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सिद्दीकी के भागने के जोखिम और गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना पर भी गौर किया।
इसके बावजूद, कोर्ट ने उसे अपनी पत्नी से उनके घर पर मिलने के लिए तीन दिन—21, 23 और 25 जुलाई—की कस्टडी पैरोल दी। उसे अपनी पत्नी के अलावा किसी और से मिलने या बातचीत करने की इजाज़त नहीं थी।
अब सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी को 18 सितंबर से पांच दिन की पैरोल दी।
Case Title – Jawad Ahmad Siddiqui v. Directorate of Enforcement