MBBS Stipend Dispute : सुप्रीम कोर्ट में NMC ने बताया: सिर्फ़ 7 मेडिकल कॉलेज इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं

Update: 2026-06-04 07:51 GMT

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सिर्फ़ सात मेडिकल कॉलेज ऐसे पाए गए, जो इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट या सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड (भत्ता) नहीं दे रहे हैं और उनके ख़िलाफ़ रेगुलेटरी कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच देश भर के मेडिकल इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड के भुगतान से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान, NMC की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गौरव शर्मा ने मेडिकल कॉलेजों द्वारा स्टाइपेंड भुगतान की स्थिति पर एक विस्तृत चार्ट पेश किया।

NMC के बयानों के अनुसार, 756 अंडरग्रेजुएट मेडिकल कॉलेजों में से 573 कॉलेजों में स्टाइपेंड भुगतान को लेकर कोई विवाद नहीं है। कमीशन ने आगे कहा कि 176 मेडिकल कॉलेज हाल ही में शुरू हुए हैं, इसलिए उनके मामले में स्टाइपेंड भुगतान का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उनके पास अभी तक कोई योग्य इंटर्न नहीं है।

NMC ने कोर्ट को बताया कि सिर्फ़ सात मेडिकल कॉलेज ऐसे पाए गए हैं जो स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं। उसने कहा कि इन संस्थानों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें उन पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है और उनके जवाबों पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कमीशन ने यह भी बताया कि एक मेडिकल कॉलेज बंद पड़ा है और उसमें कोई इंटर्न नहीं है।

पोस्टग्रेजुएट संस्थानों के संबंध में NMC ने कहा कि 562 कॉलेज पोस्टग्रेजुएट कोर्स चला रहे हैं और स्टाइपेंड का भुगतान कर रहे हैं। उसने आगे कहा कि दो कॉलेजों में कोई इंटर्न नहीं है, इसलिए उन पर स्टाइपेंड भुगतान का मुद्दा लागू नहीं होता।

इन बयानों को दर्ज करते हुए कोर्ट ने एडवोकेट चारू माथुर को इन मामलों के लिए नोडल वकील नियुक्त किया। बेंच ने पेश हुए सभी वकीलों से अनुरोध किया कि वे अपने सारांश, चार्ट और दलीलें उन्हें सौंप दें ताकि कोर्ट के विचार के लिए एक समेकित संकलन तैयार किया जा सके।

इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त, 2026 को तय की गई।

यह कार्यवाही उन याचिकाओं के एक समूह से जुड़ी है, जिनमें भारत के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को दिए जाने वाले स्टाइपेंड के भुगतान न होने और उसमें असमानता को लेकर चिंताएं जताई गईं।

पिछली सुनवाइयों के दौरान, कोर्ट ने स्टाइपेंड के भुगतान न होने की शिकायतों पर बार-बार चिंता व्यक्त की और NMC को अपने ही सर्कुलर लागू न करने के लिए फटकार लगाई।

Case Details: ABHISHEK YADAV Vs ARMY COLLEGE OF MEDICAL SCIENCES|W.P.(C) No. 730/2022

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