Lakhimpur Kheri Case : सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की गवाही न होने पर निराशा जताई, ट्रायल जज से उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में ट्रायल की धीमी गति पर निराशा जताई, खासकर पिछले दो महीनों से गवाहों को गवाही के लिए पेश न किए जाने पर। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाए और साथ ही गवाह सुरक्षा योजना का भी पालन सुनिश्चित करे।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आशीष मिश्रा पर अक्टूबर 2021 में पांच लोगों की हत्या का आरोप है; आरोप है कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों पर उनके काफिले से जुड़ी गाड़ियों ने चढ़कर उन्हें कुचल दिया था। मिश्रा कोर्ट के पिछले आदेशों के तहत अंतरिम ज़मानत पर बाहर हैं।
सुनवाई के दौरान, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि मुख्य घटना से जुड़े पहले ट्रायल में 44 गवाहों की गवाही हो चुकी है, जबकि 15 गवाहों को छोड़ दिया गया। अब 72 और गवाहों की गवाही होनी बाकी है। दूसरे ट्रायल में, 35 गवाहों में से 26 पहले ही गवाही दे चुके हैं और सिर्फ नौ बाकी हैं।
आशीष मिश्रा की ओर से पेश सीनियर वकील सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि पिछले दो महीनों से किसी भी गवाह की गवाही नहीं हुई, जबकि उनके खिलाफ ज़मानती वारंट और यहाँ तक कि गैर-ज़मानती वारंट भी जारी किए जा चुके हैं।
दवे ने कोर्ट से कहा,
"पिछले 2 महीनों से किसी भी गवाह की गवाही नहीं हुई है। ज़मानती वारंट जारी किए गए, यहां तक कि गैर-ज़मानती वारंट भी जारी किए गए... लेकिन कोई नहीं आया।"
बेंच ने इस देरी के संबंध में अभियोजन पक्ष से सवाल किया।
जस्टिस बागची ने पूछा,
"आपने मार्च से लेकर आज तक क्या किया?"
चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि अगर गवाहों की गवाही की प्रक्रिया को कुशलता से संभाला जाए तो ट्रायल को एक उचित समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सकता है।
CJI ने कहा,
"3-4 गवाहों के बजाय आप 7-8 गवाहों को समन भेजें। कम से कम जो गवाह मौजूद हैं, उनकी गवाही तो हो सकती है।"
जस्टिस बागची ने पहले पेश की गई प्रगति रिपोर्ट का भी ज़िक्र किया और बताया कि एक मौके पर जब एक गवाह कोर्ट में पेश हुआ था, तब भी सरकारी वकील ने उस गवाह की गवाही न करवाने का फैसला किया; जिसके परिणामस्वरूप अभियोजन पक्ष के गवाहों की संख्या में कोई कमी नहीं आई।
इस मामले में पीड़ितों की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है।
उन्होंने कोर्ट के सामने कहा,
"पुलिस तारीख से पहले ही गवाहों को धमका रही है... इसीलिए वे पेश नहीं हो रहे हैं।"
बेंच ने अपने आदेश में इस बात पर नाराज़गी जताई कि उसके सामने पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में पिछली तारीखों पर गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया।
कोर्ट ने कहा,
"हमें यह देखकर निराशा हुई कि तथाकथित स्टेटस रिपोर्ट में पिछली तारीखों पर गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया। ऐसा लगता है कि पिछले 2 महीनों में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई।"
कोर्ट ने ट्रायल कर रहे पीठासीन जज को निर्देश दिया कि वे दोनों मामलों में "गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाएं" और साथ ही गवाह सुरक्षा योजना का पालन भी सुनिश्चित करें। बेंच ने ट्रायल कोर्ट को आगे निर्देश दिया कि वह दोनों ट्रायल को एक तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की कोशिश करे।
कोर्ट ने एक तीसरे संबंधित ट्रायल (गवाहों को कथित तौर पर डराने-धमकाने से जुड़ा) का भी संज्ञान लिया, जिसकी स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि हालांकि चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन एक आरोपी की भूमिका की जांच अभी भी जारी है। बेंच ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जांच पूरी करे और चार हफ़्तों के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने रिपोर्ट दाखिल करे।
सुनवाई के दौरान, दवे ने बताया कि खुद अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना को लगभग पांच साल बीत जाने के बाद भी 72 गवाहों से पूछताछ होना बाकी है।
सरकारी वकील ने कोर्ट को आश्वासन देते हुए जवाब दिया कि वह ट्रायल की कार्यवाही में हो रही देरी के संबंध में अभियोजन अधिकारी से बात करेंगे।
यह मामला अक्टूबर, 2021 में लखीमपुर खीरी हिंसा के दौरान आठ लोगों की हत्या से जुड़ा है। एक ट्रायल उन पाँच लोगों की हत्या से संबंधित है जो किसानों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे थे। आरोप है कि उन्हें आशीष मिश्रा से जुड़ी एक गाड़ी से कुचल दिया गया, जिसके बाद गोलीबारी भी हुई। दूसरा ट्रायल उसके बाद भड़की भीड़ हिंसा में तीन लोगों की हत्या से संबंधित है।
Case Title: Ashish Mishra Alias Monu v. State of U.P. SLP(Crl) No. 7857/2022