[आईएनआई सीईटी परीक्षा] सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत वरीयता उम्मीदवारों के लिए सीट मैट्रिक्स पर पहुंचने के लिए निर्धारित मानदंड के लिए याचिका में नोटिस जारी किया

Update: 2021-12-08 13:44 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने आईएनआई-सीईटी परीक्षा में संस्थागत वरीयता वाले उम्मीदवारों के लिए सीट मैट्रिक्स पर पहुंचने के लिए एक परिभाषित मानदंड की मांग करने वाली एक रिट याचिका में आज नोटिस जारी किया।

जस्टिस एलएन राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा सत्र के लिए आईएनआई सीईटी परीक्षा में प्रवेश के लिए कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा।

कोर्ट रूम एक्सचेंज

जब मामला सुनवाई के लिए आया तो पीठ के पीठासीन जज जस्टिस एलएन राव ने जिपमर, पुडुचेरी के रोस्टर का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा को सरकार को एक प्रतिनिधित्व करने के लिए कहा।

जस्टिस राव ने कहा,

"अगर जिपमर किसी रोस्टर का पालन कर रहा है, तो आप सरकार को क्यों नहीं लिखते। सरकार फैसला ले सकती है। इस पर फैसला लेने का अधिकार कौन है?"

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने स्पष्ट करते हुए कहा कि हालांकि परीक्षा केंद्रीय थी, लेकिन सभी स्वतंत्र निकाय थे, उन्होंने कहा कि रोस्टर प्रणाली छात्रों को न केवल कोटा के साथ सीटें बल्कि वांछित पाठ्यक्रम भी प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी।

इस सत्र के लिए परीक्षा पहले ही आयोजित हो चुकी है, इस पर सकारात्मक जवाब मिलने पर, पीठ ने वरिष्ठ वकील को फिर से सरकार को एक अभ्यावेदन देने के लिए कहा,

"इस स्तर पर क्या किया जा सकता है? यदि परीक्षा आयोजित की गई है। आप कह रहे हैं कि संस्थागत वरीयता आपको दी गई है, यह एक मृगतृष्णा होगी। कुछ नहीं होगा।"

वरिष्ठ वकील ने कहा,

"हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि संस्थागत वरीयता के लिए परिभाषित मानदंड को प्रभावी बनाया जाना चाहिए।"

इसके बाद वरिष्ठ वकील की दलील पर पीठ ने 4 सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि इस सत्र के लिए आईएनआई सीईटी परीक्षा में प्रवेश के लिए कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा।


केस शीर्षक : स्टूडेंट्स एसोसिएशन, एम्स भोपाल और अन्य बनाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और अन्य, डब्ल्यूपी (सिविल) 1329/202

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