हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस को वर्चुअल सुनवाई के के लिए न्यायिक निर्देश जारी करना उचित नहीं': CJI सूर्यकांत

Update: 2026-05-21 08:42 GMT

'सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करने में अनिच्छा ज़ाहिर की। इस याचिका में ईंधन की खपत कम करने के उपाय के तौर पर दिल्ली की सभी अदालतों में वर्चुअल सुनवाई की अनुमति देने के निर्देश मांगे गए थे।

जब एक वकील ने याचिका को तुरंत लिस्ट करने के लिए मौखिक रूप से ज़िक्र किया तो चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसे न्यायिक पक्ष पर लिया जाए। CJI ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले ही हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस से वर्चुअल सुनवाई की अनुमति देने का अनुरोध किया।

"शायद न्यायिक पक्ष पर निर्देश जारी करना उचित न हो। मैंने पहले ही चीफ़ जस्टिस से अनुरोध किया। ज़्यादातर ने इसे लागू भी कर दिया है। यह बार (वकीलों) और बेंच (जजों) दोनों की तरफ़ से एक स्वैच्छिक पहल होनी चाहिए।"

जब वकील ने कहा कि वह "राष्ट्रीय हित" में दिल्ली की सभी ज़िला अदालतों में वर्चुअल सुनवाई की मांग कर रही हैं तो CJI ने कहा कि ज़िला अदालतें हाईकोर्ट के प्रशासनिक नियंत्रण में आती हैं और इस मामले पर फ़ैसला लेना हाईकोर्ट के लिए ही उचित होगा।

CJI ने कहा,

"ज़िला अदालतें हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आती हैं... हाईकोर्ट ही प्रशासनिक नियंत्रण रखते हैं... उन्हें ही फ़ैसला लेने दें... एक पत्र के ज़रिए, मैंने उनसे ज़िला अदालतों के लिए भी अनुरोध किया है।"

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार के ईंधन संरक्षण उपायों के अनुरूप, कुछ श्रेणियों के मामलों के लिए अनिवार्य वर्चुअल सुनवाई सहित, कई तत्काल प्रशासनिक उपाय लागू किए। यह निर्देश विविध कार्य दिवसों (सोमवार और शुक्रवार) के साथ-साथ अदालत के आंशिक कार्य दिवसों पर भी लागू था।

बाद में, बार के सदस्यों के अनुरोध के बाद अदालत ने एक स्पष्टीकरण जारी किया कि हालांकि वकीलों को वर्चुअल रूप से पेश होने के लिए प्रोत्साहित किया गया, लेकिन जो लोग अपरिहार्य कारणों से इस तरह पेश नहीं हो सकते, वे व्यक्तिगत रूप से पेश हो सकते हैं।

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट को देखते हुए सरकार ने ईंधन संरक्षण के तरीके अपनाए हैं।

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