सुप्रीम कोर्ट में एक PIL (जनहित याचिका) दायर की गई। इसमें मांग की गई कि स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के आधार पर, सभी नोटिफ़ाइड कृषि फ़सलों के लिए कानूनी रूप से लागू होने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाए। यह MSP 'C2 (खेती की वास्तविक लागत) + 50% (मुनाफ़ा मार्जिन)' फ़ॉर्मूले पर आधारित होना चाहिए।

किसान और लोकसभा के पूर्व सदस्य वाड्डे सोभनाद्रीश्वर राव की ओर से दायर इस याचिका में एक तय समय-सीमा के भीतर कर्ज़ से राहत देने का सिस्टम बनाने की भी मांग की गई। इसमें खेती से जुड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे छोटे और सीमांत किसानों के फ़सल लोन का एक बार में बकाया माफ़ करना भी शामिल हो सकता है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस याचिका को इसी तरह के एक दूसरे मामले के साथ जोड़ दिया।

संक्षेप में मामला

याचिकाकर्ता ने ऊपर बताई गई मांगों के अलावा, संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की भी मांग की। वे चाहते हैं कि एक तय समय-सीमा में ऐसा कानूनी ढांचा बनाया जाए, जिससे यह पक्का हो सके कि कोई भी कृषि उपज MSP से कम कीमत पर न खरीदी जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को 'केरल किसान ऋण राहत आयोग अधिनियम' की तर्ज़ पर केंद्रीय कानून बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया जाए।

याचिकाकर्ता किसानों - खासकर छोटे, सीमांत और बटाईदार किसानों - के लिए संस्थागत क्रेडिट (बैंकों वगैरह से मिलने वाला लोन) तक समान और पर्याप्त पहुंच की भी मांग कर रहे हैं, ताकि निजी साहूकारों पर उनकी निर्भरता कम हो सके।

कुछ अन्य राहतें इस प्रकार हैं:

- 'मॉडल एग्रीकल्चरल लैंड लीजिंग एक्ट' में उचित संशोधन करके बटाईदार किसानों को मान्यता और सुरक्षा देना, जिसमें उन्हें फसल ऋण, बीमा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

- PM-AASHA, PSS, MIS और PDPS जैसी योजनाओं के लिए फंड आवंटन बढ़ाना और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना, जो मूल्य समर्थन, खरीद और बाजार हस्तक्षेप से जुड़ी हैं।

- कृषि विपणन (मार्केटिंग) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सिंचाई के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना।

- बारिश पर निर्भरता कम करने और खेती से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए चल रही सिंचाई परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करना।

- कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना और आपदा से प्रभावित किसानों को ऋण वसूली की कार्रवाई, कृषि भूमि की मजबूरी में बिक्री आदि से बचाने के लिए दिशानिर्देश बनाना।

- जलवायु से जुड़ी कृषि आपदाओं के लिए एक वैधानिक फंड बनाना।

- यह घोषित करना कि पुराने 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' में शामिल कल्याणकारी सुरक्षा उपायों को हटाना मनमाना था, और साथ ही आजीविका की बहाली, कृषि ऋणों की रियायती अदायगी, आपदा प्रभावित किसानों के लिए नई कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) क्रेडिट सुविधाएँ देने जैसी वैधानिक सुरक्षाओं को फिर से लागू करना।

- संकटग्रस्त किसानों को तत्काल राहत देना, जैसे कि फसल खराब होने और प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में कृषि ऋणों की वसूली पर रोक (मोरेटोरियम) लगाना।

अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के 3 किसानों की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई कि कृषि उपज के लिए MSP तय करते समय खेती की वास्तविक लागत यानी 'C2' को उचित महत्व दिया जाए।

Case: VADDE SOBHANADREESWARA RAO Versus UNION OF INDIA AND ANR., Diary No. 27847-2026

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