'ध्वस्त घर के बाहर छोटी बच्ची के दृश्य ने बहुत व्यथित किया' : सुप्रीम कोर्ट जज ने विध्वंस के दौरान 'किताब लेकर भागती बच्ची' के वायरल वीडियो पर और क्या कहा

Update: 2025-04-01 14:37 GMT
ध्वस्त घर के बाहर छोटी बच्ची के दृश्य ने बहुत व्यथित किया : सुप्रीम कोर्ट जज ने विध्वंस के दौरान किताब लेकर भागती बच्ची के वायरल वीडियो पर और क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने एक वायरल वीडियो पर चिंता व्यक्त की, जिसमें एक ध्वस्त घर के बाहर छोटी बच्ची दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा,

"एक वायरल वीडियो है, जिसमें एक ध्वस्त घर के बाहर एक छोटी बच्ची दिखाई दे रही है। इस तरह के दृश्यों से हर कोई बहुत व्यथित है।"

जज ने यह बात उस मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें अदालत ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को उन छह व्यक्तियों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिनके घरों को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत आश्रय के उनके अधिकार का उल्लंघन किया गया।

पिछले सप्ताह एक्स पर सामने आए इस वीडियो में एक बच्ची को किताबें पकड़कर झुग्गी से भागते हुए दिखाया गया। मीडिया के अनुसार, यह वीडियो अंबेडकर नगर के जलालपुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान का है।

मीडिया के अनुसार, अंबेडकर नगर पुलिस ने कहा कि जलालपुर तहसीलदार अदालत के निष्कासन आदेश के आधार पर गांव की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए यह तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने कहा कि गैर-आवासीय संरचनाओं को हटाने से पहले कई नोटिस जारी किए गए और यह कार्रवाई राजस्व न्यायालय के सरकारी भूमि को पुनः प्राप्त करने के निर्देश के अनुपालन में की गई।

जस्टिस भुयान ने यह बात न्यायालय द्वारा उन छह अपीलकर्ताओं को मुआवजा देने के आदेश पारित करने के बाद कही, जिनके घरों को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया।

जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने इस कार्रवाई को "अमानवीय और अवैध" कहा। न्यायालय ने पाया कि विध्वंस नोटिस कानून की उचित प्रक्रिया के अनुसार नहीं दिए गए, अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से नोटिस देने के प्रयास करने के बजाय केवल संबंधित संरचनाओं पर उन्हें चिपका दिया। इसके अलावा, रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से अपीलकर्ताओं को नोटिस दिए जाने के एक दिन बाद विध्वंस किया गया। न्यायालय ने पाया कि इससे प्रभावित व्यक्तियों को यू.पी. शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत विध्वंस को चुनौती देने का उचित अवसर नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने भूमि पर अपीलकर्ताओं के अधिकारों पर कोई टिप्पणी नहीं की। कहा कि वे अपना स्वामित्व और हित स्थापित करने के लिए उचित कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। प्रयागराज विकास प्राधिकरण को नोटिस देने और विध्वंस करने के लिए संरचनाओं के विध्वंस के मामले में निर्देशों के अनुसार निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया।

केस टाइटल- जुल्फिकार हैदर और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य।

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