दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया, सीबीआई की याचिका पर दो हफ्ते बाद सुनवाई

Update: 2026-03-16 07:25 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (16 मार्च) को आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें दिए गए डिस्चार्ज को चुनौती दी गई है।

जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या प्रतिवादी जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहते हैं। इस पर केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने बताया कि केजरीवाल ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है, जिसमें ट्रायल कोर्ट की सीबीआई अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगाई गई थी।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो सीबीआई की ओर से पेश हुए, ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना प्रतिवादियों का अधिकार है, लेकिन यदि इसे स्थगन का आधार बनाया जा रहा है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एसएलपी इसी सप्ताह सूचीबद्ध हो। उन्होंने कहा कि इस मामले में गंभीर आपत्तियां हैं और विवादित आदेश रिकॉर्ड पर एक क्षण भी अधिक नहीं रहना चाहिए।

हालांकि अदालत ने कहा, “उन्हें जवाब दाखिल करने दीजिए”, और मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। साथ ही अदालत ने अपने अंतरिम आदेश को जारी रखा।

सुनवाई के दौरान हरिहरन ने यह भी बताया कि केजरीवाल ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका भी दायर की है, जिसमें उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें उन्होंने मामले को जस्टिस शर्मा की पीठ से किसी अन्य पीठ में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

वहीं मेहता ने कहा कि यह एक पैटर्न बन गया है—आरोप लगाओ और फिर पीछे हट जाओ। उन्होंने कहा कि ऐसे मुकदमेबाजों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि में, 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों, जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया और के. कविता शामिल हैं, को डिस्चार्ज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में सीबीआई की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।

गौरतलब है कि यह मामला राजनीतिक रूप से काफी विवादित रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था और वे 156 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुए। वहीं मनीष सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे थे।

सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिस पर 9 मार्च को जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने प्रारंभिक तौर पर कहा था कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां prima facie त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं।

दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति को राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद इसे वापस ले लिया गया। इसके बाद दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

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