BREAKING| केंद्र सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द की

Update: 2026-03-14 07:19 GMT

केंद्र सरकार ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत रद्द की। सरकार ने कहा कि यह फ़ैसला लद्दाख में शांति बहाल करने और बातचीत के लिए माहौल बनाने के मकसद से लिया गया।

एक बयान में सरकार ने कहा कि 24 सितंबर, 2025 को लेह में क़ानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा होने के बाद 26 सितंबर, 2025 को वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। हिरासत का यह आदेश लेह के ज़िला मजिस्ट्रेट ने इस इलाक़े में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से जारी किया था।

सरकार ने बताया कि वांगचुक NSA के तहत निवारक हिरासत की अधिकतम अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट पिछले अक्टूबर से वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई। हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच इस मामले की सुनवाई 17 मार्च को करेगी।

आंगमो के वकील सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने हिरासत को इस आधार पर चुनौती दी थी कि हिरासत का आधार बनने वाली सभी ज़रूरी सामग्री उन्हें नहीं दी गई। इस बात पर विवाद था कि क्या भाषणों के वीडियो, जिन्हें प्रशासन ने भड़काऊ बताया, वांगचुक को दिए गए। जहां प्रशासन ने दावा किया कि उन्होंने वांगचुक को वीडियो वाली एक पेनड्राइव दी थी, वहीं कोर्ट ने पूछा कि क्या उन्हें असल में वे वीडियो देखने का मौका मिला था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि प्रशासन वांगचुक के भाषणों का "बहुत ज़्यादा मतलब निकाल रहा था"। बेंच ने भाषणों के अनुवाद में कुछ विसंगतियों की ओर भी इशारा किया।

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