अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी | बिना इजाज़त पैसे हटाने के 105 मामले मिले: SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी और हेराफेरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसे मंदिर के काउंटिंग रूम से बिना इजाज़त पैसे हटाने या छिपाने के 105 मामले मिले हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,
"यह भी बताया गया कि PFC बिल्डिंग में बने काउंटिंग रूम के CCTV फुटेज और दूसरे ज़रूरी डिजिटल डेटा को सुरक्षित कर लिया गया और उनकी बारीकी से जांच की गई। जांच में काउंटिंग रूम से बिना इजाज़त पैसे हटाने या छिपाने के 105 मामले सामने आए हैं, जिनमें काउंटिंग प्रोसेस में शामिल दूसरे लोगों की मदद भी ली गई।"
SIT ने आठ आरोपियों की पहचान की और पाया कि कुछ मामलों में काउंटिंग प्रोसेस में शामिल दूसरे लोगों की मदद ली गई। उसने हर आरोपी द्वारा कथित तौर पर हड़पी गई रकम का भी अंदाज़ा लगाया।
SIT की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, उसे आठ आरोपियों के बैंक अकाउंट में बिना किसी स्पष्ट कारण के जमा की गई रकम भी मिली। उसने उन चल और अचल संपत्तियों की पहचान की है, जिनमें कथित तौर पर चोरी का पैसा लगाया गया और अब तक की गई रिकवरी की कोशिशों का ब्योरा दिया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने SIT की 16 सितंबर की स्टेटस रिपोर्ट देखी। यह बेंच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान की कथित चोरी की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में ट्रस्ट के फाइनेंस का व्यापक ऑडिट कराने की भी मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया। पिछले महीने, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और जनहित में काम करने वाले दूसरे नागरिकों को SIT जांच के बारे में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के ऑफिस में सुझाव देने की इजाज़त दी।
यह केस 25 जून, 2026 को आठ आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया। शुरुआती जांच में CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, तलाशी और रिकवरी का सामान, बैंक और फाइनेंशियल रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी के कागज़ात, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और फोरेंसिक सबूत इकट्ठा किए गए।
SIT ने कहा कि उसने दान लेने, उसका हिसाब-किताब रखने और उसे जमा करने से जुड़े तरीकों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की जांच की। फ़ोरेंसिक ऑडिटर के तौर पर नियुक्त ASA & Associates LLP ने अकाउंटिंग स्टाफ़ और दूसरे संबंधित लोगों के बैंक अकाउंट, कीमती सामान, CCTV फ़ुटेज और आरोपी के मोबाइल डेटा की जांच की है। इस ऑडिट में ट्रस्ट के बैंक अकाउंट में ऑनलाइन जमा की गई रकम और ऑडिट किए गए फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट के साथ मिलान भी शामिल है।
इसमें आगे कहा गया कि जांच में गड़बड़ी के संदिग्ध मामलों की पहचान, इसमें शामिल लोगों की पहचान और उनसे पूछताछ, संदिग्ध कमाई का पता लगाना, फ़ाइनेंशियल और प्रॉपर्टी की जांच, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, कीमती सामान की पुष्टि और दान व बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान शामिल है।
SIT ने TCS सॉफ़्टवेयर से 803 कीमती सामानों के लिए बनी रसीदों की पुष्टि की और उस स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया लॉकर की भी फ़िज़िकल जांच की, जिसमें उन्हें रखा गया; इन सामानों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। 86 अन्य कीमती सामानों की कोई रसीद नहीं थी। SIT ने अलग से उनकी पहचान की और फ़िज़िकल जांच की।
SIT ने लगभग 944.411 किलोग्राम सफ़ेद धातु (जिसे चांदी माना जा रहा था) से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की, जिसे ट्रस्ट ने पिघलाने के लिए 'सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड' के पास भेजा था।
इसने सोशल मीडिया और मीडिया में 200 किलोग्राम चांदी की ईंटों, 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटों, चांदी के हार, चरण पादुका और रामचरितमानस से जुड़े दान के बारे में लगाए गए आरोपों की भी जांच की। SIT ने बताया कि उसने संबंधित लोगों से पूछताछ की और ज़रूरी चीज़ों की जांच की, जिसमें कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
SIT ने बताया कि 14 सितंबर तक उसने 173 गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें ट्रस्ट के अधिकारी, अकाउंटिंग स्टाफ, बैंक अधिकारी, सुरक्षाकर्मी, CCTV ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वेंडर और प्रॉपर्टी के लेन-देन से जुड़े लोग शामिल हैं।
SIT ने कोर्ट को बताया कि उसने जांच का ज़्यादातर काम पूरा कर लिया है और वह 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' (BNSS) की धारा 193 के तहत चार्जशीट दाखिल करेगी। अगर आगे कोई सबूत या जानकारी मिलती है, तो धारा 193(9) के तहत जांच जारी रखी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि SIT पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन पूरे होने से पहले, यानी 25 सितंबर को या उससे पहले चार्जशीट दाखिल कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसकी कॉपी कोर्ट को दी जाए ताकि वह उसकी सामग्री की जांच कर सके। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और जनहित में काम करने वाले अन्य लोगों को उन मुद्दों को उठाने की भी अनुमति दी जिन पर SIT का ध्यान जाना ज़रूरी है, ताकि BNSS की धारा 193(9) के तहत एडिशनल सेशन जज या स्पेशल जज उन पर विचार कर सकें।
इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 2 नवंबर, 2026 को होगी।
Cases: Narendra Kumar Goswami v. Union of India and others | WP(c) 790/2026; Ajay Kumar Rai and another v. Sri Ram Janmabhoomi Theerth Kshetra Trust | WP(Crl) 241/2026; Sudhakar Singh v. Union of India and others | WP (Crl) 256/2026; Hindu Dharma Parishad v. The Union Of India And Ors. | WP(C) No. 827/2026