पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए दो संशोधन विधेयक पारित कर दिए। इन विधेयकों के तहत 2010 के बाद OBC सूची में शामिल किए गए 77 समुदायों को सूची से हटा दिया गया है और आरक्षण व्यवस्था को 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।

इन संशोधनों के जरिए पश्चिम बंगाल बैकवर्ड क्लासेज (आरक्षण) अधिनियम और पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 में बदलाव किए गए हैं। सरकार के अनुसार, अब केवल वे 66 समुदाय OBC सूची में बने रहेंगे, जिन्हें 2010 से पहले किए गए सर्वेक्षणों के आधार पर मान्यता दी गई थी।

सरकार ने सरकारी सेवाओं और पदों में OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, संशोधित कानून के तहत पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग को समुदायों को OBC सूची में शामिल करने या हटाने के लिए सर्वेक्षण करने, आवेदनों की जांच करने और राज्य सरकार को सिफारिशें देने का वैधानिक अधिकार दिया गया है।

यह कदम 22 मई 2024 के कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें अदालत ने 2010 के बाद OBC सूची में शामिल 77 समुदायों (जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय थे) को शामिल करने की प्रक्रिया को कानून के विपरीत बताते हुए रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना OBC दर्जा दिया था और धर्म को प्रमुख आधार बनाया गया था।

हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण की कैटेगरी A (10%) और कैटेगरी B (7%) की व्यवस्था भी निरस्त कर दी थी। हालांकि, पहले से दिए गए OBC प्रमाणपत्रों के आधार पर की गई नियुक्तियों को अदालत ने सुरक्षित रखा था।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामला अभी लंबित है।

विधानसभा में पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य हाईकोर्ट के फैसले का पालन करना और पिछड़ा वर्ग आयोग की वैधानिक भूमिका को बहाल करना है। दोनों विधेयक सदन में 186 मतों के समर्थन और 17 मतों के विरोध से पारित हुए, जबकि विपक्ष के कई सदस्यों ने मतदान से पहले वॉकआउट किया।

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