कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान से जुड़े पुराने मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी दर्ज की। राज्य ने बताया कि 2007 की घटनाओं से जुड़े छह मामलों में से पांच बंद किए जा चुके हैं और शेष एक मामले में मिलन प्रधान आरोपी नहीं हैं।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने चुनाव में प्रधान की भागीदारी का मुद्दा उठने पर राज्य से मौखिक रूप से कहा,

“उन्हें चुनाव लड़ने दें। बशर्ते उन्हें जमानत मिल जाए।”

प्रधान ने अपने खिलाफ लंबित मामलों में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। वह फिलहाल पांच अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं और उन मामलों में उन्होंने अलग से जमानत याचिका दाखिल की है।

प्रधान की ओर से सीनियर वकील अयान भट्टाचार्य ने कहा कि पुराने मामलों में वारंट तामील किए जाने के समय पर अदालत को गौर करना चाहिए। उन्होंने बताया कि नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

वकील ने इस स्थिति को लोकतंत्र को कमजोर करने का उदाहरण बताते हुए कहा कि प्रधान को पांच FIR में गिरफ्तार किया जा चुका है। आशंका है कि बाकी मामलों में भी उनके खिलाफ आगे दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने अदालत से प्रधान के खिलाफ लंबित किसी अन्य कार्यवाही का विवरण सामने रखने का निर्देश देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जिन पांच मामलों में प्रधान पहले से हिरासत में हैं उनमें वह जमानत के लिए आवेदन करेंगे। वकील ने यह भी बताया कि एक मामले में 18 सितंबर को वारंट तामील किया गया, जबकि वह मामला वर्ष 2007 का है। उन्होंने अदालत से कहा कि नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को है, 4 अक्टूबर को प्रचार खत्म हो जाएगा और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी।

प्रधान की ओर से यह भी कहा गया कि एक मामले में उन्हें सीधे गिरफ्तार नहीं किया गया।

राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने बताया कि प्रधान के खिलाफ कुल 11 मामले हैं और इनमें से पांच मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है। राज्य के अनुसार, बाकी छह मामलों में से पांच को पिछली सरकार ने वापस ले लिया था और उन मामलों में प्रधान वांछित नहीं हैं।

राज्य ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान लंबित वारंटों की तामील करना पुलिस की प्रक्रिया का हिस्सा है और प्रधान के खिलाफ वारंट भी इसी प्रक्रिया के तहत तामील किए जा रहे हैं। राज्य की ओर से यह भी बताया गया कि प्रधान ही अकेले गिरफ्तार नहीं किए गए हैं, बल्कि उसी मामले में लंबित वारंट वाले अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।

इसके जवाब में प्रधान के वकील ने कहा कि वर्ष 2007 के मामलों में वारंट अब ऐसे समय में तामील किए जा रहे हैं, जब प्रधान विपक्षी दल की ओर से नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवार बन चुके हैं।

इस पर हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,

“सभी मामले 2007 के हैं। 9 अक्टूबर तक कोई कदम न उठाएं।”

राज्य की ओर से मामले का निपटारा करने का अनुरोध किया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने ऐसा करने से इनकार किया। अदालत ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

मिलन प्रधान को 18 सितंबर को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में लंबित वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद चार अन्य मामलों में भी उनकी गिरफ्तारी दिखाई गई और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, हत्या के इरादे से अपहरण, साक्ष्य गायब करने, घर में जबरन घुसने और घातक हथियारों के साथ दंगा करने जैसे आरोप शामिल हैं।

नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

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