पश्चिम बंगाल चुनाव: हाईकोर्ट में केवल केंद्रीय व PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र बनाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

Update: 2026-04-30 12:01 GMT

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र नियुक्त करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की।

याचिका में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के उस मेमो को चुनौती दी गई है, जिसमें हर काउंटिंग टेबल पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की नियुक्ति अनिवार्य की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने Representation of the People Act, 1951 का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह का आदेश जारी करना CEO के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि कानून में केवल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का उल्लेख है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरा चुनाव राज्य सरकार के कर्मचारियों के जरिए कराया गया, तो मतगणना के समय केंद्रीय कर्मचारियों को क्यों शामिल किया जा रहा है।

वहीं, चुनाव आयोग (ECI) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर्स हैंडबुक के अनुसार काउंटिंग सुपरवाइज़र केंद्र या राज्य सरकार के गजेटेड अधिकारी हो सकते हैं और नियुक्तियां उसी के तहत की गई हैं। आयोग ने याचिका को “सिर्फ आशंकाओं पर आधारित” बताते हुए कहा कि यह मान लेना गलत है कि केंद्रीय कर्मचारी निष्पक्ष नहीं होंगे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी सवाल किया कि अगर दोनों तरह के कर्मचारी नियुक्त किए जा सकते हैं, तो केवल केंद्रीय कर्मचारियों पर ही जोर क्यों दिया जा रहा है। साथ ही यह भी पूछा कि “विभिन्न पक्षों से आशंका” का आधार क्या है।

चुनाव आयोग ने कहा कि मतगणना पहले ही निर्धारित है और इस स्तर पर हस्तक्षेप से प्रक्रिया प्रभावित होगी। उसने यह भी तर्क दिया कि आयोग के फैसलों के पक्ष में वैधानिक धारणा (presumption of correctness) होती है।

मामले में बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। अदालत ने फिलहाल मामले में उठाए गए कानूनी सवालों पर विचार जारी रखा है।

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