कोलकाता हाइकोर्ट ने सहकारी बैंक कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने का निर्वाचन आयोग का निर्देश रद्द किया

Update: 2026-01-16 09:45 GMT

कोलकाता हाइकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के संबंध में बालागेरिया सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर लगाने के लिए जारी निर्वाचन आयोग (EC) का निर्देश रद्द कर दिया।

हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वायत्त सहकारी बैंक के कर्मचारी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उन्हें चुनाव कार्य के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

यह आदेश जस्टिस कृष्णा राव ने बैंक के कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने 19 सितंबर, 2025 को जारी उस पत्र को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक से कर्मचारियों का विवरण निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया, ताकि चुनाव कर्मियों का डेटाबेस तैयार किया जा सके।

कर्मचारियों का कहना था कि बालागेरिया सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक एक पंजीकृत सहकारी संस्था है, जो अपने उपविधानों के तहत कार्य करती है और जिसका संचालन निर्वाचित बोर्ड द्वारा किया जाता है। बैंक के कर्मचारियों का वेतन और सेवा लाभ पूरी तरह बैंक के अपने फंड से दिए जाते हैं तथा राज्य या केंद्र सरकार का बैंक के प्रशासन, वित्त या कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है।

इस आधार पर याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उन्हें संविधान के अनुच्छेद 324(6) या जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 26 और 159 के तहत सरकारी कर्मचारी मानकर चुनाव ड्यूटी पर नहीं लगाया जा सकता।

हाइकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निर्वाचन आयोग केवल उन्हीं कर्मचारियों की सेवाएं ले सकता है, जिन पर राष्ट्रपति या राज्यपाल का नियंत्रण या अनुशासनात्मक अधिकार हो।

जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि सहकारी बैंक स्वायत्त संस्थाएं होती हैं और वे सरकारी या सरकार नियंत्रित संस्थाओं की श्रेणी में नहीं आतीं।

हाइकोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन सहित विभिन्न न्यायिक मिसालों का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 324 और धारा 159 के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग सीमित और कानूनी दायरे में ही किया जा सकता है।

अदालत ने निर्वाचन आयोग द्वारा कर्मचारियों का डेटा पोर्टल पर अपलोड करने संबंधी निर्देश को रद्द करते हुए कहा कि स्वायत्त सहकारी बैंक के कर्मचारियों को चुनाव से जुड़े कार्य करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

इस प्रकार, WPA नंबर 27006/2025 में दायर याचिका स्वीकार कर ली गई और मामले में कोई लागत नहीं लगाई गई।

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