कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई सक्षम और कमाने वाला पति अपनी वास्तविक आय जानबूझकर छिपाता है, तो उसे इसका लाभ उठाकर अपने नाबालिग बच्चे को दिए जाने वाले भरण-पोषण की राशि कम कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

जस्टिस उदय कुमार ने यह टिप्पणी करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पश्चिम मेदिनीपुर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नाबालिग बेटी का अंतरिम भरण-पोषण ₹9,000 से घटाकर ₹8,000 प्रति माह कर दिया गया था।

मामले में पत्नी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत कार्यवाही शुरू कर अपने और अपनी नाबालिग बेटी के लिए अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने पत्नी को ₹7,000 और बेटी को ₹9,000 प्रति माह देने का आदेश दिया था।

पति ने दावा किया कि उसकी वर्तमान आय केवल ₹15,000 प्रति माह है। हालांकि, अपीलीय अदालत ने खुद पाया कि उसने अपने रोजगार और आय से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दी तथा अपनी आय के समर्थन में वेतन पर्चियां भी पेश नहीं कीं।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब अदालत पहले ही यह निष्कर्ष निकाल चुकी थी कि पति ने अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति का खुलासा नहीं किया है, तो आर्थिक परिस्थितियों में किसी बदलाव का ठोस प्रमाण न होने पर बेटी के भरण-पोषण की राशि कम करने का कोई आधार नहीं था।

कोर्ट ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत जब कोई सक्षम पति अपनी वास्तविक आय छिपाता है, तो अपनी वास्तविक आर्थिक क्षमता बताने का दायित्व उसी पर अधिक होता है।

अदालत ने कहा, “एक अपीलीय अदालत बिना किसी ठोस आधार के भरण-पोषण कम करके आय छिपाने की प्रवृत्ति को पुरस्कृत नहीं कर सकती।”

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Rajnesh v. Neha मामले में निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया और कहा कि भरण-पोषण की कार्यवाही का उद्देश्य सामाजिक कल्याण से जुड़ा है तथा कोई सक्षम व्यक्ति अपनी वास्तविक आर्थिक क्षमता की जानकारी छिपाकर अपने दायित्व से बच नहीं सकता।

हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मजिस्ट्रेट के 29 अक्टूबर 2022 के आदेश को बहाल कर दिया, जिससे नाबालिग बेटी को फिर से ₹9,000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण मिलेगा।

ट्रायल कोर्ट को मुख्य भरण-पोषण मामले की सुनवाई में तेजी लाने और पक्षकारों के मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य दर्ज करने के बाद, हाईकोर्ट के आदेश की सूचना मिलने से अधिमानतः छह महीने के भीतर कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया गया।

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