कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि किसी चुनाव याचिका के लंबित होने मात्र से पूरे जिले में रखी गई हर EVM-VVPAT मशीन को रोककर नहीं रखा जा सकता। चुनाव सामग्री का संरक्षण उसी मशीन या सामग्री तक सीमित होना चाहिए, जिसका संबंध उस चुनाव या न्यायिक कार्यवाही से सीधे तौर पर हो जिसके लिए उसे सुरक्षित रखना जरूरी है।

जस्टिस अनन्या बंद्योपाध्याय ने यह टिप्पणी हुगली के जिला निर्वाचन अधिकारी को 29-आरामबाग (SC) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित EVM-VVPAT मशीनों की पहचान कर उन्हें अलग करने की अनुमति देते हुए की। इस निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ी चुनाव याचिका फिलहाल लंबित है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस चुनाव को चुनौती दी गई, उससे जुड़ी EVM-VVPAT को सुरक्षित रखना जारी रखना होगा। लेकिन किसी अन्य चुनाव से संबंधित ऐसी मशीनें, जिनका लंबित चुनाव याचिका से कोई संबंध नहीं है। केवल इसलिए अनिश्चितकाल तक नहीं रोकी जा सकतीं, क्योंकि वे उन्हीं गोदामों में रखी हैं जहां संबंधित चुनाव की मशीनें भी मौजूद हैं।

कोर्ट ने कहा कि चुनाव सामग्री का संरक्षण ऐसी चिन्हित सामग्री तक सीमित होना चाहिए, जिसका उस चुनाव या कार्यवाही से संबंध हो जिसके लिए संरक्षण आवश्यक है।

मामला जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से दाखिल आवेदन से जुड़ा था। अधिकारी ने खराब VVPAT-EVM, जिसमें मतदान से पहले इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें भी शामिल हैं, को मरम्मत, दोबारा उपयोग योग्य बनाने और भविष्य के चुनावों में इस्तेमाल करने के लिए जारी करने की अनुमति मांगी थी। इसके साथ ही अलग-अलग मशीनों की पहचान कर उन्हें अलग गोदामों में स्थानांतरित करने की अनुमति भी मांगी गई।

हाईकोर्ट ने इस मामले में दो अलग-अलग चुनाव याचिकाओं से संबंधित चुनाव सामग्री के बीच स्पष्ट अंतर किया। ईपी संख्या 1/2019 हुगली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 28 के चुनाव से संबंधित है जबकि EP/4/2024 29-आरामबाग (SC) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव से जुड़ी है।

कोर्ट ने कहा कि हुगली लोकसभा सीट से संबंधित चुनाव याचिका में जारी संरक्षण संबंधी निर्देशों के आधार पर केवल इसलिए आरामबाग निर्वाचन क्षेत्र की ईवीएम और वीवीपैट को सुरक्षित रखने की जरूरत नहीं हो सकती, क्योंकि दोनों तरह की मशीनें एक ही जिले में रखी गई हैं।

हालांकि, आरामबाग चुनाव से संबंधित EP4/2024 के लंबित होने के कारण उस चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनें मामले में साक्ष्य का हिस्सा हो सकती हैं। इसलिए उनसे संबंधित EVM- VVPAT को सुरक्षित रखना जरूरी है।

कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका के जरिए किसी चुनाव की वैधता को अदालत के समक्ष चुनौती दी जाती है और जिस चुनाव को चुनौती दी गई, उससे संबंधित चुनाव सामग्री उस विवाद के निपटारे में साक्ष्य का हिस्सा बन सकती है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जिला निर्वाचन अधिकारी को विस्तृत तरीके से मशीनों की पहचान और अलग-अलग करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने न तो जिले में मौजूद सभी मशीनों को रोककर रखने की अनुमति दी और न ही सभी मशीनों को एक साथ जारी करने की अनुमति दी।

कोर्ट का निर्देश स्पष्ट है कि चुनाव याचिका लंबित होने के आधार पर पूरे जिले की EVM-VVPAT को सामूहिक रूप से सुरक्षित रखने के बजाय केवल संबंधित चुनाव से जुड़ी मशीनों को ही संरक्षित किया जाए।

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