'सीनियरिटी-कम-मेरिट के तहत प्रमोशन कैडर में सीनियरिटी के आधार पर होना चाहिए, न कि शुरुआती अपॉइंटमेंट की तारीख के आधार पर': बॉम्बे हाईकोर्ट
Bombay High Court
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जहां प्रमोशन “सीनियरिटी-कम-मेरिट” के सिद्धांत से होते हैं, वहां सीनियरिटी को फीडर कैडर में गिना जाना चाहिए, न कि सर्विस में शुरुआती अपॉइंटमेंट की तारीख के आधार पर। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई कर्मचारी प्रमोशनल पोस्ट के लिए तय मिनिमम एलिजिबिलिटी और मेरिट की ज़रूरतों को पूरा कर लेता है तो तुरंत निचले कैडर में सीनियरिटी तय करने वाली हो जाती है, और एम्प्लॉयर प्रमोशनल हायरार्की को बदलने के लिए सर्विस में आने की तारीख पर वापस नहीं जा सकता।
जस्टिस आर.आई. छागला और जस्टिस अद्वैत एम. सेठना की डिवीजन बेंच पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें उन्हें सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के पद पर प्रमोशन देने से मना कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स की फाइनल सीनियरिटी लिस्ट 11 सितंबर, 2024 को पब्लिश हुई, जिसमें उन्हें प्राइवेट रेस्पोंडेंट्स से सीनियर दिखाया गया। इसके बावजूद, DPC ने पहले के सरकारी कम्युनिकेशन्स और 25 मई, 2004 की कट-ऑफ डेट पर भरोसा करते हुए सर्विस में शुरुआती अपॉइंटमेंट की तारीख से सीनियरिटी को ध्यान में रखकर प्रमोशन पर विचार करने का फैसला किया, जिससे याचिकाकर्ताओं को सुपरसीड कर दिया गया।
कोर्ट ने पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन सर्विस रूल्स, 2014 की जांच की, जिसमें यह कहा गया कि प्रमोशन से अपॉइंटमेंट सीनियरिटी-कम-मेरिट के प्रिंसिपल पर किए जाएंगे। इसने माना कि इस प्रिंसिपल के लिए पहले यह असेसमेंट करना होगा कि कैंडिडेट के पास प्रमोशनल पोस्ट के लिए मिनिमम मेरिट और एलिजिबिलिटी है या नहीं। उसके बाद फीडर कैडर में सीनियरिटी के आधार पर प्रमोशन देना होगा। बेंच ने कहा कि न तो सर्विस रूल्स और न ही 1 अगस्त, 2019 का लागू सरकारी रेजोल्यूशन सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के पोस्ट पर प्रमोशन के लिए सर्विस जॉइन करने की शुरुआती तारीख के आधार पर सीनियरिटी तय करने की इजाजत देता है।
कोर्ट ने कहा,
“फीडर कैडर में प्रमोशनल पोस्ट के लिए सीनियरिटी पोजीशन को नज़रअंदाज़ करते हुए जॉइनिंग/शुरुआती एंट्री की तारीख, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के पद सहित प्रमोशन के लिए क्राइटेरिया नहीं होनी चाहिए।”
हाईकोर्ट ने फ़ाइनल सीनियरिटी लिस्ट से अलग होने को सही ठहराने के लिए कॉर्पोरेशन के सरकारी लेटर और बाद के प्रस्तावों पर भरोसा करने को यह देखते हुए खारिज किया कि एग्जीक्यूटिव कम्युनिकेशन संविधान के आर्टिकल 309 के तहत बनाए गए कानूनी सर्विस नियमों को ओवरराइड नहीं कर सकते।
कोर्ट ने आगे कहा कि कॉर्पोरेशन द्वारा भरोसा किया गया 7 मई, 2021 का सरकारी प्रस्ताव केवल उन रिज़र्व कैटेगरी के कैंडिडेट पर लागू होता है, जिन्होंने प्रमोशन में रिज़र्वेशन का फायदा उठाया और याचिकाकर्ता जैसे ओपन कैटेगरी के कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं होता। कोर्ट ने DPC के विवादित ऑर्डर को भी गलत पाया, क्योंकि यह रहस्यमयी और बिना वजह का था, और याचिकाकर्ता के रिप्रेजेंटेशन पर डिटेल में विचार करने की ज़रूरत वाले हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों का पालन करने में नाकाम रहा।
इसलिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमिटी के विवादित फैसले और उसके बाद हुए प्रमोशन प्रोसेस रद्द किया और निर्देश दिया कि सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के पद पर प्रमोशन पूरी तरह से 11 सितंबर, 2024 की फाइनल सीनियरिटी लिस्ट के आधार पर ही माना जाए।
Case Title: Bipin Vasant Shinde & Ors. v. Pune Municipal Corporation & Ors. [WRIT PETITION NO. 17202 OF 2025]