केस ट्रांसफर से पहले हाईकोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बावजूद सिविल कोर्ट टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन की नए सिरे से जांच कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केस ट्रांसफर करने से पहले हाईकोर्ट द्वारा 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज़ XII के तहत मंज़ूरी देने का मतलब यह नहीं है कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट, केस ट्रांसफर होने के बाद टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन के मुद्दे की नए सिरे से जांच नहीं कर सकता।
कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट एक्ट, 1948 की धारा 4A(2) के तहत सिटी सिविल कोर्ट को ट्रांसफर किए गए केस को ऐसे देखना होता है जैसे वह मूल रूप से उसी के सामने दायर किया गया हो। अगर उसे लगता है कि उसके पास टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन नहीं है तो वह 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर' के ऑर्डर VII नियम 10 के तहत शिकायत (Plaint) वापस कर सकता है।
जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख उस अपील पर सुनवाई कर रही थीं, जो मूल वादी (Plaintiff) ने बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की, जिसमें शिकायत को सही कोर्ट में पेश करने के लिए वापस कर दिया गया। जब केस हाईकोर्ट में दायर किया गया, तब 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज़ XII के तहत मंज़ूरी दी गई। बाद में बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट की आर्थिक अधिकार क्षेत्र (Pecuniary Jurisdiction) की सीमा बढ़ने पर केस उस कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
प्रतिवादी (Defendant) ने इस आधार पर शिकायत वापस करने की मांग की कि केस 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर' की धारा 16 के तहत वर्जित (Barred) था। वादी का तर्क था कि एक बार हाईकोर्ट द्वारा क्लॉज़ XII के तहत मंज़ूरी मिल जाने के बाद सिटी सिविल कोर्ट टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन के मुद्दे पर दोबारा विचार नहीं कर सकता।
कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट एक्ट, 1948 की धारा 4A(2) और बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट (केस ट्रांसफर) नियम, 2012 का नियम 3 यह प्रावधान करते हैं कि ट्रांसफर किए गए केस की सुनवाई और निपटारा सिटी सिविल कोर्ट द्वारा ऐसे किया जाना चाहिए जैसे वह मूल रूप से उसी कोर्ट में दायर किया गया हो।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे ट्रांसफर का नतीजा यह होता है कि 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर' की धारा 16, 17 और 20 के प्रावधान सिटी सिविल कोर्ट पर लागू होते हैं, जिससे वह टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन से जुड़ी आपत्तियों की जांच कर सकता है।
कोर्ट ने आगे कहा कि क्लॉज़ XII के तहत मंज़ूरी हाईकोर्ट को अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) देती है, लेकिन यह अपने आप (ipso facto) उस अधिकार क्षेत्र को सिटी सिविल कोर्ट में ट्रांसफर नहीं करती, जहां अन्यथा सिटी सिविल कोर्ट के पास टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि सिटी सिविल कोर्ट का इस मामले पर विचार करना, हाईकोर्ट के इजाज़त देने वाले आदेश की समीक्षा करने जैसा नहीं है, बल्कि यह ट्रांसफ़र किए गए मुकदमों से जुड़े कानूनी नियमों के तहत अपने अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) की जांच करने जैसा है।
कोर्ट ने कहा,
"हाईकोर्ट द्वारा क्लॉज़ XII के तहत इजाज़त देने से सिटी सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सुरक्षित नहीं हो जाता, क्योंकि 2012 के अमेंडमेंट एक्ट की धारा 4A(2) के अनुसार, सिटी सिविल कोर्ट को मुकदमा ऐसे मिलता है जैसे वह मूल रूप से उसी के सामने दायर किया गया हो, भले ही सिटी सिविल कोर्ट हाई कोर्ट के अधीन हो।"
इसके अनुसार, कोर्ट ने अपील खारिज की और बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें सही कोर्ट में पेश करने के लिए 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर' के ऑर्डर VII नियम 10 के तहत शिकायत (प्लेंट) वापस की गई।
Case Title: Nouveau Exports Pvt. Ltd. v. Punita Capoor [Appeal From Order No. 407 of 2026]