BREAKING | 2013 के रेप केस में पत्रकार तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा बरी करने का फ़ैसला

Update: 2026-08-06 06:00 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार (6 अगस्त) को मापुसा की सेशंस कोर्ट का फ़ैसला पलट दिया। सेशंस कोर्ट ने नवंबर 2013 में जूनियर सहयोगी द्वारा दर्ज कराए गए रेप केस में 'तहलका' मैगज़ीन के एडिटर-इन-चीफ़ तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था।

जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की डिवीज़न बेंच ने गोवा सरकार की अपील मंज़ूर करते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया। बेंच ने तेजपाल को रेप और यौन उत्पीड़न के अपराधों के लिए दोषी पाया। इसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के साथ-साथ धारा 354A और 354B शामिल हैं।

अब सज़ा पर अलग से सुनवाई होगी।

फ़ैसला सुनाए जाने के बाद सीनियर एडवोकेट आबाद पोंडा ने बेंच से अनुरोध किया कि सज़ा सुनाते समय उनके क्लाइंट के प्रति नरमी बरती जाए, क्योंकि यह अपराध कम से कम 13 साल पुराना है। उन्होंने दोषी ठहराने के आदेश पर कम से कम 8 हफ़्ते के लिए रोक लगाने का अनुरोध किया ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा सके, क्योंकि यह बरी करने के फ़ैसले को पलटने का मामला था।

जब आदेश सुनाया गया तो तेजपाल कोर्टरूम में मौजूद थे, क्योंकि बेंच ने आदेश के लिए मामला सुरक्षित रखते हुए उन्हें फ़ैसला सुनाए जाने के समय मौजूद रहने का निर्देश दिया था। बेंच से बात करते हुए तेजपाल ने कहा कि वह अब 62 साल के हैं और नरमी की गुहार लगाई।

उन्होंने कहा,

"मैं 62 साल का हूँ और मेरा मानना ​​है कि मैं पीड़ित हूँ। मेरी पत्नी है। इसके अलावा ज़्यादा कुछ कहने को नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूँ कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें। बाकी तथ्य रिकॉर्ड पर रखे गए हैं।"

सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नरमी बरतने की अपील का विरोध करते हुए कहा,

"पीड़िता के उनकी बेटी की उम्र की होने के बावजूद, उन्होंने अपराध किया... उन्हें पिता समान माना जाता था, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था... एक मिसाल कायम की जानी चाहिए... पीड़िता ने मना किया, लेकिन वे अगले दो दिनों तक भी आगे बढ़ते रहे... इस अदालत को समाज को एक स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि जब कोई लड़की 'ना' कहती है, तो उसका मतलब 'ना' ही होता है। 'ना' का मतलब 'ना' है।"

बता दें, सेशंस कोर्ट ने 21 मई 2021 को तेजपाल को बरी कर दिया था।

Case Title: State of Goa vs Tarunjit Tejpal (CRIA/16/2022)

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