कोई VVIP भी क़ानून से ऊपर नहीं: महाराष्ट्र के सरकारी कैंटीनों पर 'झूठी' रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट, FDA अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

Update: 2026-08-01 07:00 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को सरकारी कैंटीनों की खाद्य सुरक्षा जांच में कथित पक्षपात और भ्रामक रिपोर्ट पेश करने पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कानून से ऊपर कोई VVIP नहीं है और सरकारी कैंटीनों के लिए अलग तथा निजी भोजनालयों के लिए अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते।

एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने FDA आयुक्त को निर्देश दिया कि मंत्रालय (मंत्रालय भवन) और विधान भवन के कैंटीनों को 98 प्रतिशत अनुपालन वाला बताने वाली रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

मामले की सुनवाई मुंबई के प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय भोजनालय पूर्णिमा और पार्क इन होटल की ओर से दायर याचिकाओं पर हो रही थी। इन प्रतिष्ठानों ने FDA द्वारा उनके खाद्य सुरक्षा लाइसेंस निलंबित किए जाने को चुनौती दी। FDA ने निरीक्षण के दौरान पूर्णिमा में फलों और सब्जियों पर काले धब्बे तथा होटल में कीड़े मिलने जैसी कमियों का हवाला देकर कार्रवाई की।

इससे पहले हाईकोर्ट ने FDA को सरकारी और अर्द्धसरकारी संस्थानों के कैंटीनों का औचक निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। FDA ने हाईकोर्ट परिसर के चार और मंत्रालय तथा विधान भवन के तीन कैंटीनों का निरीक्षण किया। अपनी रिपोर्ट में विभाग ने मंत्रालय और विधान भवन के कैंटीनों को 98 प्रतिशत तक खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप बताया।

हालांकि, रिपोर्ट की सत्यता परखने के लिए कोर्ट ने वकीलों कैनाज़ ईरानी, स्वानंद गानू, फिरोज भरूचा और चंद्रकांत चव्हाण को स्वतंत्र निरीक्षण का जिम्मा सौंपा। वकीलों की रिपोर्ट FDA के दावों से बिल्कुल अलग निकली। कोर्ट के समक्ष पेश तस्वीरों में गंदे रसोईघर और बर्तन धोने की जगह, मच्छर और मक्खियां, खुले में रखा भोजन, गंदे कपड़े से ढका खाना, रिसती नालियां, टूटी और गंदी टाइलें तथा बदहाल रेफ्रिजरेटर दिखाई दिए।

इन तस्वीरों पर नाराजगी जताते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे ने कहा,

"आपने केले और सब्जियों पर कुछ काले धब्बे मिलने पर निजी भोजनालयों के लाइसेंस निलंबित कर दिए, लेकिन मंत्रालय के कैंटीनों का क्या होगा? तस्वीरें आपकी रिपोर्ट को झूठा साबित कर रही हैं। हर नागरिक कानून के सामने बराबर है और इस देश में कोई भी वीवीआईपी कानून से ऊपर नहीं है।"

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि निजी भोजनालयों के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई की गई है तो सरकारी कैंटीनों के साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भारत में मक्खियां हर जगह होती हैं।

जब पूर्णिमा भोजनालय में मक्खियां होने का मुद्दा उठाया गया तो एक्टिंग चीफ जस्टिस ने कहा,

"हम भारत में रहते हैं, मक्खियां हर जगह हैं। हाईकोर्ट में भी मक्खियां हैं।"

रेफ्रिजरेटर की तस्वीर देखते हुए उन्होंने कहा,

"इससे बेहतर तो जूतों की अलमारी होती है।"

साथ ही अधिकारियों से पूछा कि ऐसी स्थिति के बावजूद 98 प्रतिशत अनुपालन का अंक कैसे दिया गया।

खंडपीठ ने यह भी सवाल उठाया कि निजी प्रतिष्ठानों को सुधार का अवसर दिए बिना उसी दिन लाइसेंस निलंबित क्यों कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को सुधार का एक अवसर मिलना चाहिए और FDA को पहले सुधार संबंधी नोटिस जारी करना चाहिए।

कोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने पूर्णिमा और पार्क इन के लाइसेंस निलंबन को फिलहाल स्थगित रखने पर सहमति जताई। साथ ही दोनों निजी प्रतिष्ठानों और मंत्रालय तथा विधान भवन के कैंटीनों को सुधार नोटिस जारी कर मंगलवार तक कमियां दूर करने का समय देने की बात कही। इसके बाद बुधवार सुबह दोबारा निरीक्षण किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि FDA ने पूर्णिमा के निरीक्षण में लगभग पांच घंटे और पार्क इन के निरीक्षण में करीब नौ घंटे लगाए, जबकि मंत्रालय और विधान भवन के तीनों कैंटीनों का निरीक्षण केवल 30 से 45 मिनट में पूरा कर लिया गया। कोर्ट ने यह भी माना कि तीनों सरकारी कैंटीनों को 98 प्रतिशत अंक देने वाली रिपोर्ट प्रथम दृष्टया "कॉपी-पेस्ट" और "महज दिखावा" प्रतीत होती है।

इसी आधार पर खंडपीठ ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंडे को निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट की जांच कर उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करें और अगली सुनवाई तक इसकी अनुपालन रिपोर्ट पेश करें।

हालांकि, कोर्ट ने FDA के मौजूदा नेतृत्व की ओर से राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के प्रयासों की सराहना भी की। कोर्ट ने कहा कि विभाग लंबे समय बाद प्रभावी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई निष्पक्ष और समान हो। कोर्ट ने कहा कि सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए और किसी भी तरह का पक्षपात स्वीकार्य नहीं होगा।

मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

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