हाईकोर्ट ने मीडिया पर राजेश खन्ना के पुराने बंगले को 'शापित', 'भूतिया' या 'अशुभ' कहने पर लगाई रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मीडिया हाउस और कुछ YouTube चैनलों को बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना के मशहूर बंगले 'आशीर्वाद' के बारे में कोई भी अपमानजनक बात पोस्ट करने या "अशुभ, भूतिया, शापित या मनहूस" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से रोका।
सिंगल-जज जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने यह आदेश बिजनेसमैन शशि किरण शेट्टी द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया। शेट्टी अब मुंबई के पॉश इलाके बांद्रा के कार्टर रोड पर स्थित इस बंगले के मालिक हैं।
शेट्टी, जिन्होंने पुराने बंगले को गिराकर नया ढांचा बनवाया था, का कहना है कि उन्होंने इस नए बंगले का नाम भी "आशीर्वाद" ही रखा है। हालांकि, उन्हें NDTV, Scoopwhoop और अन्य मीडिया आउटलेट्स द्वारा फैलाए गए उन वीडियो से परेशानी हुई, जिनमें कहा गया कि "आशीर्वाद" बंगला "शापित" है क्योंकि इसने तीन सुपरस्टार्स का करियर खत्म कर दिया। कुछ रिपोर्टों में इस बंगले को मुंबई की सबसे "भूतिया" जगहों में से एक भी बताया गया।
इसलिए शेट्टी ने सीनियर एडवोकेट डॉ. वीरेंद्र सराफ के ज़रिए जस्टिस डॉक्टर की बेंच में याचिका दायर की। उन्होंने मीडिया आउटलेट्स के खिलाफ़ ऐसे अपमानजनक कंटेंट पोस्ट करने पर रोक लगाने की मांग की, क्योंकि यह उनकी गरिमा और निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने आपत्तिजनक वीडियो हटाने की भी मांग की।
रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद जस्टिस डॉक्टर ने माना कि शेट्टी का मामला प्रथम दृष्टया (prima facie) मजबूत है।
जस्टिस डॉक्टर ने कहा,
"प्रथम दृष्टया मेरी राय है कि वादी (Plaintiff) द्वारा मांगी गई राहत पूरी तरह से उचित है। मेरी शुरुआती राय में यह सामग्री स्पष्ट रूप से वादी के लिए अपमानजनक है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वादी एक भूतिया और तथाकथित शापित बंगले में रहता है। इसके अलावा, यह स्पष्ट रूप से वादी के शांति और गरिमा के साथ रहने के अधिकार का भी उल्लंघन करेगा।"
उल्लेखनीय है कि जस्टिस डॉक्टर ने अपने 24 जुलाई के आदेश में यह भी नोट किया कि प्रतिवादी मीडिया हाउस या YouTube चैनलों में से किसी ने भी - जिन्हें नोटिस भेजा गया - इन आपत्तिजनक प्रकाशनों को सही ठहराने या उनका बचाव करने की कोशिश नहीं की।
जज ने आदेश दिया,
"इसलिए मेरी शुरुआती राय में ऐसी पब्लिकेशन पूरी तरह से गलत और सनसनी फैलाने वाली होंगी, जिससे वादी को नुकसान होगा, जबकि इसमें वादी की कोई गलती नहीं है। इसलिए वादी ने अंतरिम राहत पाने के लिए अपना पक्ष सही साबित किया है।"
बेंच ने प्रतिवादियों को आदेश दिया कि वे सुनवाई की अगली तारीख, जो 21 अगस्त तय की गई, उससे पहले अपना जवाब दाखिल करें।
Case Title: Shashi Kiran Shetty vs Scoopwhoop Media Pvt. Ltd. [Suit (L) 18587 of 2026]