बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को साउथ इंडियन फिल्म एक्ट्रेस सामंथा रूथ प्रभु के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा करते हुए Google, Meta Platforms और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और 'जॉन डो' (अज्ञात पक्षों) को आदेश दिया कि वे उनसे जुड़ा आपत्तिजनक और अपमानजनक कंटेंट हटा दें।

सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि प्रभु मुख्य रूप से साउथ इंडियन 'मेगा स्टार' रही हैं और अब उन्होंने बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी खास पहचान बनाई है। साथ ही वह 'फिल्मफेयर' अवॉर्ड भी जीत चुकी हैं।

प्रभु की ओर से पेश वकील रश्मिन खांडेकर ने कई ऐसी वेबसाइट्स, पोर्नोग्राफिक पोर्टल्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, AI चैटबॉट्स और यहां तक ​​कि प्राइवेट संस्थाओं का ज़िक्र किया, जो उनकी तस्वीरों, डीपफेक इमेज, वीडियो, मॉर्फ्ड इमेज आदि का गैर-कानूनी और बिना इजाज़त इस्तेमाल करके उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन कर रही हैं।

खांडेकर ने कहा,

"वादी मुख्य रूप से साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की स्टार हैं, लेकिन अब हिंदी बॉलीवुड फिल्मों में भी काम कर रही हैं... वह फिल्मफेयर अवॉर्ड विजेता हैं... वह साउथ इंडस्ट्री की मेगा स्टार हैं... मीडिया में भी उनकी बड़ी मौजूदगी है... प्रतिवादियों में वे वेबसाइट्स शामिल हैं, जो उनकी AI से बनी मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरें, वीडियो और यहां तक ​​कि ऑडियो क्लिप्स का इस्तेमाल कर रही हैं... कुछ पोर्नोग्राफिक वेबसाइट्स ने AI की मदद से उनके मॉर्फ्ड वीडियो और तस्वीरें बनाई हैं... AI कुछ भी कर सकता है और प्रतिवादी इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं..."

तर्कों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद बेंच ने कहा कि प्रभु के पर्सनैलिटी और प्राइवेसी राइट्स (जो भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) और आर्टिकल 21 से मिलते हैं) और कॉपीराइट एक्ट के तहत सुरक्षित उनके नैतिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

जस्टिस जामदार ने कहा,

"वादी भारत की सबसे मशहूर अभिनेत्रियों और कलाकारों में से एक हैं। उनका करियर तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में 15 साल से ज़्यादा का रहा है... रिकॉर्ड पर मौजूद जानकारी से पता चलता है कि मॉर्फ्ड और डीपफेक पोर्नोग्राफिक तस्वीरों से वादी की पर्सनैलिटी, प्राइवेसी और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है... उनके पर्सनैलिटी से जुड़े अधिकार संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत और जीवन व प्राइवेसी का अधिकार आर्टिकल 21 के तहत सुरक्षित हैं... एक कलाकार के तौर पर उनके नैतिक अधिकार कॉपीराइट एक्ट के तहत अलग से सुरक्षित हैं... इस तरह, जिन कंटेंट के बारे में उन्होंने इस मामले में शिकायत की है, उनसे इन सभी अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इसलिए, अंतरिम राहत देने के लिए प्रथम दृष्टया एक बहुत मजबूत मामला बनता है।"

इन बातों को ध्यान में रखते हुए बेंच ने Google, Facebook और दूसरे पोर्टल्स को प्रभु से जुड़े विवादित और आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, जज ने Google को 'इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021' के नियम 3 के तहत उसकी 'ज़िम्मेदारी' की याद दिलाई। यह नियम ऐसे इंटरमीडियरीज पर 'पूरी सावधानी' बरतने की ज़िम्मेदारी डालता है ताकि यह पक्का किया जा सके कि किसी को ऑनलाइन परेशान न किया जाए, या उनकी तस्वीरें या वीडियो बिना इजाज़त अपलोड न किए जाएं, वगैरह।

जस्टिस जामदार ने मौखिक रूप से कहा,

"यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला है और इंटरमीडियरीज को 'इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021' के नियम 3 के तहत अपनी ज़िम्मेदारियां निभाते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।"

इस मामले की सुनवाई अब उचित समय पर होगी।

Case Title : Samantha Ruth Prabhu vs John Does, Ashok Kumar

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