बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीएम मोदी पर 'आपत्तिजनक पोस्ट' के खिलाफ FIR पर यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटिल की याचिका पर नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (22 जनवरी) को यूट्यूबर और यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले डॉक्टर संग्राम पाटिल की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य बीजेपी नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर 'आपत्तिजनक' सोशल मीडिया पोस्ट करने का मामला दर्ज किया गया।
भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक पाटिल, जो हाल ही में मुंबई आए थे, उन्हें शहर के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में अपने खिलाफ दर्ज FIR के बारे में तब पता चला, जब इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके खिलाफ पेंडिंग लुक आउट सर्कुलर (LOC) का हवाला देते हुए उन्हें वापस घर जाने से रोक दिया। यह FIR 18 दिसंबर, 2025 को बीजेपी मीडिया सेल के प्रमुख निखिल भामरे की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
जस्टिस अश्विन भोबे ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई की तारीख पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
सीनियर वकील सुदीप पासबोला के माध्यम से दायर अपनी याचिका में पाटिल ने LOC और FIR दोनों को चुनौती दी। अदालत से इन्हें रद्द करने का आग्रह किया। अंतरिम राहत के तौर पर पाटिल ने अदालत से मामले में जांच पर रोक लगाने और आगे के आदेश तक अभियोजन पक्ष को मामले में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई जैसे चार्जशीट दाखिल करने से रोकने का आग्रह किया है। उन्होंने अदालत से उन्हें यूके में अपने घर वापस जाने की अनुमति देने का भी आग्रह किया।
भामरे की शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया ब्राउज़ करते समय उन्हें कुछ "आपत्तिजनक सामग्री" मिली, जिसके परिणामस्वरूप 'शहर विकास अघाड़ी' नामक एक फेसबुक पेज पर बीजेपी और उसके प्रमुख नेताओं के बारे में "गलत जानकारी" फैलाई गई। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पाटिल ने गलत सूचना फैलाने और अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ दुश्मनी भड़काने के इरादे से इस सामग्री को साझा या प्रचारित किया था।
इसलिए एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज की, जो समूहों के बीच दुश्मनी भड़काने के लिए झूठी जानकारी फैलाने के किसी भी कार्य या प्रयास को दंडित करती है। यह एक गैर-जमानती अपराध भी है।
गौरतलब है कि पाटिल को शुरू में 10 जनवरी को लंदन से शहर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था। 19 जनवरी को इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने LOC का हवाला देते हुए उन्हें लंदन वापस जाने से रोक दिया, जिसके बाद 21 जनवरी को उन्होंने पुलिस के सामने अपने बयान दर्ज करवाए।
मामले की अगली सुनवाई 4 अप्रैल को होगी।