बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV के काम करने और फुटेज को सुरक्षित रखने की स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (15 जुलाई) को राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि क्या महाराष्ट्र के सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरे काम कर रहे हैं और संबंधित पुलिस स्टेशन उनके डेटा को कितने समय तक सुरक्षित रखते हैं।
एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने DGP से 10 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा।
आदेश में कहा गया,
"हम पुलिस महानिदेशक से कहते हैं कि वे परमवीर सिंह मामले में आए फैसले को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों की स्थिति का जायजा लेने के लिए तथ्यों की जांच शुरू करें। साथ ही, वे CCTV कैमरों के काम करने और पुलिस स्टेशनों में सभी CCTV से जुड़े हार्ड डिस्क में डेटा को सुरक्षित रखने की अवधि के बारे में रिपोर्ट सौंपें। रिपोर्ट में यह भी बताया जाना चाहिए कि सोमनाथ लक्ष्मण गिरी मामले में 21 मार्च 2022 के आदेश के तहत इस कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए क्या कदम उठाए गए। साथ ही, यह भी बताया जाए कि घाटकोपर पुलिस स्टेशन ने हमें यह क्यों बताया कि CCTV फुटेज को 6 महीने से अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता और वह उपलब्ध नहीं है। ऐसी रिपोर्ट 10 अगस्त 2026 को कोर्ट में पेश की जाए।"
गौरतलब है कि दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा परमवीर सिंह मामले में दिए गए फैसले में ऐसे रिकॉर्डिंग सिस्टम वाले CCTV कैमरे लगाने का आदेश दिया गया, जिनसे डेटा को 18 महीने की अवधि तक स्टोर और सुरक्षित रखा जा सके। राज्य और केंद्र सरकारों को ऐसे उपकरण खरीदने का निर्देश भी दिया गया, जिनसे अधिकतम अवधि तक और किसी भी स्थिति में कम से कम 1 साल तक डेटा स्टोर किया जा सके।
सोमनाथ गिरी मामले में 21 मार्च 2022 को पारित आदेश के संबंध में राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव ने यह वचन दिया था कि वे अपने सिस्टम को लगातार 'अपडेट और टॉप-अप' करते रहेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि रिकॉर्ड 12 महीने के बजाय 18 महीने तक स्टोर और सुरक्षित रखे जाएं। बेंच ने सोमनाथ कोकाने की याचिका पर यह आदेश दिया। कोकाने ने मुंबई के उपनगर घाटकोपर पुलिस स्टेशन के 17 मार्च 2025 से 20 मार्च 2025 तक के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की। हालांकि, उस पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर ने उन्हें बताया कि CCTV फुटेज केवल छह महीने के लिए ही सुरक्षित रखे जाते हैं, इसलिए वे फुटेज नहीं दिए जा सकते जिनकी वे मांग कर रहे हैं।
बता दें, कोकाने ने एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि वह व्यक्ति फर्जी राशन कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि घाटकोपर पुलिस अधिकारी उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाल रहे थे और उन्हें धमका भी रहे थे, क्योंकि आरोपी का एक रिश्तेदार पुलिसकर्मी है।
कोकाने ने दावा किया कि उन्हें तत्कालीन कॉर्पोरेटर और अन्य राजनेताओं के नाम पर धमकाया गया। फिर भी उन्होंने धमकियों और दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। इसलिए उन पर कुछ गैर-संज्ञेय अपराधों (non-cognisable offences) के तहत मामला दर्ज किया गया और उनके खिलाफ 'चैप्टर प्रोसीडिंग्स' (कानूनी कार्रवाई) शुरू की गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये 'चैप्टर प्रोसीडिंग्स' फर्जी राशन कार्ड धारक के खिलाफ उनकी शिकायत के जवाब में की गई जवाबी कार्रवाई के अलावा और कुछ नहीं थीं। उन्होंने दावा किया कि ये कार्रवाई 'किसी' के प्रभाव में शुरू की गई थी और इसी बात का पता लगाने के लिए उन्होंने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की।
इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
Case Title: Prashant Satyawan Kokane vs State of Maharashtra (Writ Petition 1196 of 2026)