26/11 मामले में बरी फहीम अंसारी को पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट देने से इनकार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं को माना उचित
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में बरी किए गए फहीम अंसारी की वह याचिका खारिज की, जिसमें उसने ऑटो-रिक्शा चलाकर आजीविका कमाने के लिए अनिवार्य पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश मांगा था।
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीतसिंह भोंसले की खंडपीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा व्यक्त चिंताओं को देखते हुए पुलिस द्वारा प्रमाणपत्र देने से इनकार करना उचित है।
अदालत ने कहा,
“मामले के तथ्यों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्राधिकारियों द्वारा पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट देने से इनकार उचित है।”
फहीम अंसारी 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में एकमात्र आरोपी है, जिसे विशेष अदालत ने वर्ष 2010 में बरी कर दिया था। उस पर आरोप था कि उसने मुंबई के नक्शे तैयार कर पाकिस्तान स्थित कथित साजिशकर्ताओं को उपलब्ध कराए लेकिन अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर उसे दोषमुक्त किया। बाद में एक अन्य मामले में उसे लखनऊ में दोषसिद्धि हुई और 10 वर्ष की सजा सुनाई गई।
याचिका में फहीम ने कहा था कि जेल से रिहा होने के बाद उसने विभिन्न नौकरियां कीं लेकिन आय पर्याप्त न होने के कारण उसने ऑटो-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया। इसके लिए उसे ड्राइविंग लाइसेंस भी मिल गया परंतु व्यावसायिक रूप से ऑटो चलाने हेतु आवश्यक पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट पुलिस ने देने से इनकार किया।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जवाब में पुलिस ने बताया था कि प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों के कारण उसे प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता।
फहीम ने दलील दी थी कि बरी होने के बावजूद केवल मुकदमा चलने के आधार पर उसे आजीविका के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता और यह उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और माना कि सुरक्षा संबंधी पहलुओं को देखते हुए पुलिस का निर्णय न्यायसंगत है।
इसी के साथ अदालत ने उसकी याचिका खारिज की।