RWA के रोजमर्रा के विवादों पर सीधे याचिका नहीं चलेगी: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने को कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के रोजमर्रा के प्रबंधन से जुड़े विवादों को लेकर सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट (निर्माण संवर्धन, स्वामित्व एवं अनुरक्षण) अधिनियम, 2010 के तहत ऐसे विवादों के निपटारे के लिए सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से औपचारिक शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित करने पर विचार करे।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित सर्वोदय अपार्टमेंट के चार निवासियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ताओं ने RWA के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसके तहत परिसर के 10 में से 6 प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। उनका कहना था कि इससे निवासियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि परिसर की सड़कों के आधे से अधिक हिस्से पर अवैध पार्किंग होती है, जिससे जाम की स्थिति बनती है। साथ ही RWA पर पार्किंग शुल्क वसूलने और शुल्क नहीं देने वालों के वाहनों पर क्लैंप लगाकर प्रतिदिन 500 रुपये वसूलने का भी आरोप लगाया गया।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि RWA का गठन बिना चुनाव कराए किया गया।
वहीं RWA ने अदालत को बताया कि संस्था का पंजीकरण 29 मार्च, 2023 को हुआ था और 12 फरवरी, 2023 को चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। यह भी कहा गया कि दो याचिकाकर्ता परिसर का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं, जिसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस जारी किए ।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी आवासीय परिसर के प्रबंधन के लिए लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित RWA कार्यरत है, तो उसे उपविधियों के अनुसार साझा सुविधाओं, मरम्मत और प्रबंधन से जुड़े निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पार्किंग के लिए निर्धारित स्थान तय हैं तो वहां के अलावा अन्य स्थान पर वाहन खड़ा करना अनधिकृत पार्किंग माना जा सकता है और RWA ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई कर सकती है।
गेट बंद किए जाने के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि केवल कुछ प्रवेश द्वार बंद होने से किसी व्यक्ति के आवागमन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। संविधान भी उचित परिस्थितियों में युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।
याचिका की सुनवाई योग्य होने के सवाल पर हाईकोर्ट ने कहा कि RWA लोकतांत्रिक संस्था है और उसके निर्णयों से यदि कुछ सदस्य असहमत हैं तो ऐसे विवादों का समाधान पहले उसी संस्था के भीतर होना चाहिए। ऐसे मामलों को सीधे रिट याचिका के माध्यम से अदालत में नहीं लाया जा सकता।
हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि 2010 के अधिनियम में एक महत्वपूर्ण कमी है। अधिनियम में कुछ मामलों में अपील का प्रावधान है, लेकिन गेट बंद करने, पार्किंग शुल्क, यातायात अव्यवस्था या स्वच्छता जैसी सामान्य शिकायतों के समाधान के लिए कोई स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था नहीं है।
इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि अधिनियम की धारा 27(1) के तहत सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से ऐसे विवादों के निस्तारण के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाने पर विचार कर आवश्यक आदेश पारित करे।
इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका खारिज की।