इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 2026 के पंचायत चुनावों से पहले एक समर्पित अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई।

यह PIL एडवोकेट मोती लाल यादव ने दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि 6 सदस्यीय समर्पित OBC आयोग बनाने का प्रस्ताव राज्य कैबिनेट (जिसका नेतृत्व प्रतिवादी नंबर 1, CM आदित्यनाथ कर रहे हैं) के पास 5 महीने से ज़्यादा समय से लंबित है।

याचिका में कहा गया कि ऐसे आयोग के गठन के बिना राज्य सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य मामले में तय किए गए "ट्रिपल टेस्ट" मानदंडों को पूरा नहीं कर सकता है। LL 2021 SC 13।

बता दें, विकास किशनराव गवली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि OBC श्रेणी के लिए आरक्षण का प्रावधान करने से पहले ट्रिपल टेस्ट का पालन किया जाना चाहिए।

उक्त ट्रिपल टेस्ट में शामिल हैं:

(1) राज्य के भीतर स्थानीय निकायों के संबंध में पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभावों की समकालीन कठोर अनुभवजन्य जांच करने के लिए एक समर्पित आयोग का गठन करना।

(2) आयोग की सिफारिशों के आलोक में स्थानीय निकाय-वार आरक्षण के लिए आवश्यक अनुपात निर्दिष्ट करना, ताकि यह अत्यधिक व्यापक न हो।

(3) SC/ST/OBC के पक्ष में आरक्षित कुल सीटों का कुल मिलाकर 50 प्रतिशत से अधिक न होना।

याचिका में कहा गया कि यदि आयोग का गठन नहीं किया जाता। चुनाव 2021 की आरक्षण सूची के आधार पर कराए जाते हैं तो यह यूपी पंचायत राज अधिनियम, 1947 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन होगा।

PIL में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि राज्य चुनाव आयोग ने पहले ही आश्वासन दिया कि अप्रैल से जुलाई, 2026 में होने वाले तीन-स्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियां सही रास्ते पर हैं।

इसमें यह भी कहा गया कि राज्य चुनाव आयोग औपचारिक प्रक्रिया तभी शुरू कर सकता है जब राज्य सरकार सीटों के आरक्षण को अंतिम रूप दे दे।

याचिकाकर्ता ने यह भी आशंका व्यक्त की कि आयोग के गठन में देरी से स्थानीय निकाय चुनाव 2027 तक टल सकते हैं। इससे संभावित रूप से यह कार्यक्रम राज्य विधानसभा चुनावों के साथ मिल सकता है। अजीब बात यह है कि रिट याचिका में "माननीय मुख्यमंत्री, कैबिनेट सचिव के माध्यम से" को पहले प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया।

मुख्य राहत यह मांगी गई कि मुख्यमंत्री (कैबिनेट के प्रमुख के तौर पर) को कमीशन बनाने के लंबित प्रस्ताव पर फैसला लेने का निर्देश दिया जाए।

यूपी पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 11A(2) का हवाला देते हुए PIL याचिका में कहा गया कि OBC सीटों का आरक्षण वैध अनुभवजन्य सर्वेक्षण से प्राप्त जनसंख्या डेटा के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

Tags: