राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति शिकायत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, CBI और ED से मांगी प्रगति रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों का सत्यापन कर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
इन-चैंबर सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि एजेंसी को शिकायत प्राप्त हो चुकी है और वह आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करेगी।
वहीं ED की ओर से भी अदालत को सूचित किया गया कि शिकायत प्राप्त हो गई है और एजेंसी आरोपों का सत्यापन कर सकती है। इसके बाद जांच की प्रगति से अदालत को अवगत कराया जाएगा।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,
“यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है तो कानून के अनुसार आरोपों का सत्यापन किया जाना चाहिए। यह कहने की आवश्यकता नहीं कि CBI या ED कानून के तहत उपलब्ध उचित कदम उठा सकती हैं।”
अदालत ने सभी पक्षों जिनमें नए जोड़े गए प्रतिवादी भी शामिल हैं, को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि जवाब के साथ शिकायत पर हुई कार्रवाई और जांच की प्रगति की जानकारी भी अदालत को दी जाए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने की मांग की। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद इन विभागों को पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी।
इसके अलावा केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की ओर से मौखिक निर्देश प्राप्त हुए और संबंधित तथ्यों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या इस प्रकार की मांगों के लिए रिट याचिका सुनवाई योग्य है। इस पर याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत मांगने के समर्थन में विभिन्न फैसलों का हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि इस दलील की वैधता का परीक्षण संबंधित पक्षों के जवाब और प्रत्युत्तर दाखिल होने के बाद किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए दस्तावेज और कागजात पहले के आदेश के अनुसार सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखे जाएं।
मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।