बीमारी का बहाना बनाकर दूसरी अदालत में पेश हुआ वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश करने वाले वकील पर सख्त रुख अपनाते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वकील ने एक मामले में बीमारी का पर्चा भेजकर अनुपस्थित रहने की सूचना दी, जबकि उसी दिन वह दूसरी अदालत में पेश हो रहा था।
जस्टिस गौतम चौधरी ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित वकील ने न केवल बीमारी का गलत बहाना बनाया बल्कि यह भी नहीं बताया कि आवेदकों को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल चुकी है।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
“वकील का आचरण यह दर्शाता है कि उन्होंने अदालत को धोखा देने का प्रयास किया, जो न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है। एक वकील होने के नाते यह उनका कर्तव्य है कि वह सही तथ्यों के साथ अदालत की सहायता करें ताकि अदालत का बहुमूल्य समय बचाया जा सके।"
मामला अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा था। आवेदकों का कहना था कि उनके और शिकायतकर्ता के बीच कई विवाद चल रहे हैं और दुर्भावना के चलते एक नया मामला दर्ज कराया गया। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि इसी प्रकरण में आवेदकों को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिल चुका है।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत को जानकारी दी कि आवेदकों के वकील ने जहां एक ओर बीमारी का हवाला देकर इस मामले में अनुपस्थिति जताई, वहीं दूसरी ओर वह उसी दिन एक विशेष अपील में दूसरी अदालत में उपस्थित हुआ।
इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। साथ ही वकील पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए एक महीने के भीतर जमा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय में जुर्माना नहीं जमा किया गया तो मामले को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के समक्ष उचित कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है।