जमीन आवंटन के बाद भी खत्म नहीं होती SDM की जिम्मेदारी: इलाहाबाद हाइकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि जमीन का आवंटन करने के बाद भी उपजिलाधिकारी (SDM) की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती बल्कि उन्हें आवंटी के कब्जे की सुरक्षा तब तक करनी होती है, जब तक जमीन का स्वामित्व राज्य के पास रहता है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 65 के तहत SDM को यह अधिकार और कर्तव्य है कि वह अवैध कब्जे को हटाकर आवंटी को जमीन पर कब्जा दिलाएं और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
अदालत ने कहा कि यदि SDM की भूमिका केवल प्रारंभिक कब्जा दिलाने तक सीमित मान ली जाए तो कमजोर वर्ग के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है, जो इस कानून के उद्देश्य के विपरीत होगा।
मामले में याचिकाकर्ता महिला को वर्ष 2012 में जमीन आवंटित की गई। पति की मृत्यु के बाद जब उसने घर बनाने का प्रयास किया तो कुछ लोगों ने उसे धमकाया और जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। उसने प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हाइकोर्ट ने कहा कि राज्य यह नहीं कह सकता कि जमीन का मालिक होते हुए भी उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल आवंटी पर है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग को आवास उपलब्ध कराना है, इसलिए उनकी जमीन की सुरक्षा करना भी राज्य का कर्तव्य है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आवंटी को भूधारक का दर्जा नहीं मिलता और जमीन का स्वामित्व राज्य या ग्राम सभा के पास ही रहता है। ऐसे में राज्य और ग्राम पंचायत पर यह दायित्व है कि वे जमीन को अतिक्रमण से बचाएं।
अंत में हाइकोर्ट ने संबंधित SDM को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता की शिकायत पर संज्ञान लें और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें ताकि उसे उसकी जमीन पर सुरक्षित कब्जा मिल सके।