ऑनलाइन बिक रहा है चाइनीज मांझा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट

Update: 2026-07-15 13:33 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह जांच करने का निर्देश दिया कि प्रतिबंध के बावजूद क्या चाइनीज मांझा अब भी ऑनलाइन मंचों के माध्यम से बेचा जा रहा है।

जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वर्ष 2018 से लंबित जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

इन याचिकाओं में उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के आयात, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चाइनीज मांझा ऑनलाइन उपलब्ध है और इस संबंध में एक समाचार पत्र में भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई।

इस पर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

"यह जानकारी दी गई कि चाइनीज मांझा अब ऑनलाइन उपलब्ध है और इस संबंध में समाचार पत्र में भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई। प्रतिवादियों के वकील इस पहलू की भी जांच करें।"

यह आदेश ऐसे समय आया, जब कुछ सप्ताह पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि वह चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए कड़ा कानून लाने की तैयारी कर रही है।

सरकार ने मई 2026 में अदालत को बताया कि प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री एवं उपयोग प्रतिषेध) अधिनियम' रखा जा सकता है। साथ ही इस कानून में चाइनीज मांझे से घायल या प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान भी शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक प्रतिवादी की ओर से दाखिल संक्षिप्त जवाब और अन्य पक्षों की ओर से दाखिल अतिरिक्त जवाब को रिकॉर्ड पर लिया।

कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि सभी जवाबों की प्रतियां याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ता को उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने की भी अनुमति दी गई।

सुनवाई में पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव (गृह), प्रमुख सचिव (राज्य कर), प्रमुख सचिव (पर्यावरण) तथा अपर मुख्य सचिव, आधारभूत संरचना एवं औद्योगिक विकास समेत कई वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

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