डुअल पैन कार्ड मामला: आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर लगाई रोक; जमानत मंजूर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कथित दो पैन कार्ड मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे एवं पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान की सजा पर रोक लगाई। कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाएं भी मंजूर कर लीं। इस आदेश के बाद दोनों के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो सकता है।
जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने सजा निलंबित करने की मांग वाली अर्जियों को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और NI जाफरी के साथ एडवोकेट शाश्वत आनंद पेश हुए थे। वहीं राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट अनूप त्रिवेदी और एडवोकेट परितोष कुमार मालवीय ने पक्ष रखा।
आजम खान और अब्दुल्ला खान ने कथित दो पैन कार्ड मामले में अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिकाएं दाखिल कीं।
पिछले साल नवंबर में रामपुर कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शोभित बंसल ने दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 467, 468, 420, 471 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया था। ये धाराएं जालसाजी, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।
यह मामला साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना की ओर से दर्ज कराई गई SIR से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे और उन्होंने इनका इस्तेमाल अनुचित लाभ हासिल करने के लिए किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार अब्दुल्ला ने शुरुआत में आयकर विभाग से एक पैन कार्ड बनवाया, जिसमें उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी। यही जन्मतिथि उनके स्कूल और हाईस्कूल के प्रमाणपत्रों में भी दर्ज थी। इस पैन कार्ड का इस्तेमाल बैंक खाता संचालित करने और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी किया गया।
हालांकि, आरोप है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए अब्दुल्ला ने अपनी बैंक पासबुक में बदलाव किया और पैन कार्ड से संबंधित विवरण भी बदल दिए। इसके बाद नामांकन पत्र दाखिल करते समय कथित तौर पर बदली हुई बैंक पासबुक की प्रति जमा की गई।
दूसरे पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यह कथित हेरफेर विधानसभा चुनाव लड़ने की पात्रता हासिल करने के लिए किया गया, क्योंकि चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष होना आवश्यक है। अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में आजम खान भी शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया कि नामांकन पत्र में जिस बैंक अकाउंट का उल्लेख किया गया, वह दूसरे पैन कार्ड से न तो जुड़ा था और न ही उसके जरिए संचालित किया जाता था।