पुलिस की लापरवाही से महिला को 12 दिन अतिरिक्त जेल में रहना पड़ा, हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस पर लगाया 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की लापरवाही के कारण 12 दिन अतिरिक्त जेल में रहने वाली एक महिला को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस को दिया। अदालत ने कहा कि जमानत याचिका में राज्य के वकील को समय पर आवश्यक निर्देश उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण महिला की जमानत अर्जी पर समय से सुनवाई नहीं हो सकी और उसे जेल में अतिरिक्त समय बिताना पड़ा।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने निर्देश दिया कि पुलिस विभाग एक महीने के भीतर महिला को 25 हजार रुपये का भुगतान करे। साथ ही विभाग को यह छूट दी कि जांच में जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आए, उनके वेतन से मुआवजे की राशि वसूल की जा सकती है।
अदालत लीलावती देवी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वह दहेज मृत्यु के एक मामले में आरोपी हैं। मृत महिला उनकी बहू थी जिसकी कथित तौर पर घरेलू विवाद के बाद फंदे से लटककर मौत हो गई।
मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को हुई थी। इस दौरान सहायक सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि देवरिया के पुलिस अधीक्षक कार्यालय को 29 सितंबर 2026 को पत्र भेजे जाने के बावजूद जमानत याचिका के संबंध में आवश्यक निर्देश उपलब्ध नहीं कराए गए। यह पत्र पुलिस अधीक्षक कार्यालय को 1 अक्टूबर को प्राप्त हो गया, लेकिन इसके बावजूद समय पर जवाब नहीं भेजा गया।
इस पर हाईकोर्ट ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि आवश्यक निर्देश समय पर क्यों नहीं भेजे गए।
24 अक्टूबर को देवरिया के पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि संबंधित पत्र 2 अक्टूबर को पैरवीकार को सौंप दिया गया। हालांकि, संबंधित कर्मचारी ने आवश्यक निर्देश तैयार कराने के बजाय पत्र अपने पास रख लिया और छुट्टी पर चला गया।
पुलिस अधीक्षक ने अदालत को बताया कि संबंधित पैरवीकार के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके अलावा हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए जिम्मेदार क्षेत्राधिकारी के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को स्वीकार किया लेकिन उनसे भविष्य में अधिक सतर्क रहने की अपेक्षा की।
पीठ ने यह भी ध्यान दिलाया कि इससे पहले 25 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के अनुपालन में पुलिस महानिदेशक ने 6 जनवरी 2026 को परिपत्र जारी किया। इसमें सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया कि जमानत याचिकाओं के मामलों में सहायक सरकारी वकीलों को समय पर आवश्यक पुलिस निर्देश उपलब्ध कराए जाएं।
हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत के लिए उपयुक्त मामला होने के बावजूद 12 अक्टूबर को याचिका का निस्तारण नहीं हो सका। मामले पर दोबारा 24 अक्टूबर को सुनवाई हुई, यानी महिला को 12 दिन से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा।
अदालत ने कहा कि पुलिस विभाग की गलती के कारण महिला को 12 दिन जेल में बिताने पड़े। इसी लापरवाही को देखते हुए अदालत ने पुलिस विभाग को मुआवजे के रूप में 25 हजार रुपये देने का निर्देश दिया।
जमानत याचिका के गुण-दोष पर सुनवाई के दौरान महिला के वकील ने दलील दी कि उन्हें सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर झूठा फंसाया गया। बचाव पक्ष के अनुसार, ऐसा पर्याप्त साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि महिला ने दहेज की मांग को लेकर मृतका को प्रताड़ित किया।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया लेकिन बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत तथ्यों का खंडन नहीं कर सकी।
मामले की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों और महिला की कथित भूमिका पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की जा रही है।