इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नशे की हालत में मस्जिद में शराब की बोतल फेंककर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

Update: 2026-07-01 05:15 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। उस पर आरोप है कि उसने नशे की हालत में मस्जिद में शराब की बोतल फेंकी, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

सुरक्षा देते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि पहली नज़र में ऐसा लगता है कि चूंकि याचिकाकर्ता नशे की हालत में था, इसलिए उसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रहा होगा।

संक्षेप में मामला

आज़मगढ़ पुलिस ने याचिकाकर्ता-आवेदक के खिलाफ BNS की धारा 298 [किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना] के तहत मामला दर्ज किया। आरोप था कि नशे की हालत में उसने शराब की वह बोतल मस्जिद में फेंक दी, जिसे वह पी रहा था।

वहां गिरने पर बोतल टूट गई। पुलिस का दावा है कि इस हरकत से दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

संबंधित FIR को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए डिवीजन बेंच ने यह राय व्यक्त की:

"पहली नज़र में याचिकाकर्ता नशे की हालत में था और ऐसा लगता है कि उसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रहा होगा।"

बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किए और उन्हें जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। अब इस मामले में आदेश के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की गई।

महत्वपूर्ण बात यह है कि बेंच ने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक याचिकाकर्ता (विक्रांत सिंह) को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील अजीत सिंह यादव, अमित राणा, आशीष राणा और कमलेश कुमार यादव पेश हुए।

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