शौचालय की सुविधा अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मानव अधिकार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता सुधार के निर्देश दिए
बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पर्याप्त स्वच्छता और शौचालय की सुविधा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह अधिकार झुग्गी बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को भी समान रूप से प्राप्त है, भले ही वे झुग्गियां नगर निगम की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई हों। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब बड़ी आबादी किसी क्षेत्र में निवास करती है तो नगर निगम अपने वैधानिक और संवैधानिक दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकता।
जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ मुंबई के गोवंडी स्थित बुद्ध नगर इलाके की दयनीय स्वच्छता व्यवस्था को लेकर दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में बताया गया कि लगभग 1,83,000 वर्ग मीटर में फैले इस क्षेत्र में 4,000 से अधिक लोग रहते हैं, जबकि पूरे इलाके में केवल 60 शौचालय सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें से कई अत्यंत जर्जर और अस्वच्छ स्थिति में हैं। यह भी बताया गया कि वर्ष 2019 में झुग्गी स्वच्छता कार्यक्रम के तहत शौचालय निर्माण के लिए कार्यादेश जारी किया गया था लेकिन न तो मरम्मत हुई और न ही नियमित रखरखाव किया गया।
हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की शिकायत को पूरी तरह सही ठहराते हुए कहा कि भूमि के किसी छोटे हिस्से पर झुग्गी पुनर्विकास योजना लंबित होने का यह अर्थ नहीं है कि पूरे क्षेत्र में रहने वाली बड़ी आबादी को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जाए। कोर्ट ने दोहराया कि मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 के तहत नगर निगम की जिम्मेदारी झुग्गी क्षेत्रों में भी पूरी तरह बनी रहती है।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
“भले ही यह क्षेत्र झुग्गी बस्ती बताया गया हो और पूरी भूमि नगर निगम की ही क्यों न हो, फिर भी नगर निगम का यह दायित्व है कि वह वहां की जनसंख्या के अनुपात में पर्याप्त संख्या में शौचालय उपलब्ध कराए और उनका नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित करे, ताकि झुग्गी निवासियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।”
खंडपीठ ने कहा कि 4,000 से अधिक आबादी के लिए केवल 60 शौचालय सीटें किसी भी मानक से अत्यंत अपर्याप्त हैं और यह नगर निगम अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि स्वच्छता कोई दया या सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक दायित्व है। इसके उल्लंघन से संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन होता है।
कोर्ट ने आगे कहा,
“शौचालय और स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मानव अधिकार से जुड़ा है। यह इस तथ्य के बावजूद लागू होता है कि संबंधित क्षेत्र नगर निगम की भूमि पर अतिक्रमण से बनी झुग्गी बस्ती ही क्यों न हो।”
इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCJM) को निर्देश दिया कि वह झुग्गी क्षेत्र के भीतर उपलब्ध खुले स्थानों की पहचान कर आबादी के अनुरूप अतिरिक्त शौचालय ब्लॉक का निर्माण दो माह के भीतर करे। साथ ही, कोर्ट ने मौजूदा शौचालयों की तत्काल मरम्मत, नियमित सफाई और दैनिक रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा इस कार्य की कड़ी निगरानी संबंधित सहायक नगर आयुक्त द्वारा किए जाने को कहा।
हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा की जिम्मेदारी से राज्य और नगर निगम किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हट सकते।