'I Love Mohammed' पोस्ट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी ज़मानत

Update: 2026-05-05 11:59 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर यह पोस्ट करने का आरोप था कि वह 'I Love Mohammed' के लिए अपना सिर कटवा भी सकता है और दूसरों का सिर काट भी सकता है।

जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने यह टिप्पणी की कि आवेदक द्वारा की गई 'कथित आपत्तिजनक' पोस्ट में किसी खास जाति या समुदाय का नाम नहीं लिया गया।

आरोपी-नदीम मुजफ्फरनगर ज़िले का रहने वाला है। उस पर पिछले साल यूपी पुलिस ने उसकी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर कथित तौर पर संवेदनशील टिप्पणियाँ करने के आरोप में BNS की धारा 353(2), 192, और 152 के तहत मामला दर्ज किया।

ज़मानत की गुहार लगाते हुए उसके वकील ने हाईकोर्ट में यह दलील दी कि अब चार्जशीट भी जमा की गई और निकट भविष्य में मुक़दमे के पूरा होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

दूसरी ओर, ज़मानत की अर्ज़ी का विरोध करते हुए राज्य सरकार के अतिरिक्त सरकारी वकील ने यह दलील दी कि उसने असंवेदनशील टिप्पणी पोस्ट की थी, जिसमें कहा गया था:

"I Love Mohammed के लिए गर्दन कटवा भी सकते हैं और काट भी सकते हैं।"

यह ज़ोरदार ढंग से तर्क दिया गया कि इस तरह के आपत्तिजनक नारे के कारण बरेली ज़िले में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे, जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचा था। आगे यह भी तर्क दिया गया कि असामाजिक तत्वों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गई, जिन्हें इस तरह के नारों से उकसाया गया।

हालांकि, AGA ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उक्त मामला बरेली ज़िले से संबंधित है, और उसमें जिस आरोपी नदीम खान का ज़िक्र है, वह यह आवेदक नहीं है।

इस पृष्ठभूमि को देखते हुए जांच के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री, आवेदक को सौंपी गई भूमिका और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आवेदक 7 अक्टूबर, 2025 से जेल में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, कोर्ट ने उसे ज़मानत पर रिहा करना उचित समझा।

Case title - Nadeem vs State Of U.P. Through Principal Secretary (Home), Lucknow 2026 LiveLaw (AB) 259

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