पीड़ित का रिश्तेदार होने मात्र से प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मृतक का करीबी रिश्तेदार है, उसकी गवाही को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि निकट संबंधी स्वाभाविक गवाह होते हैं और सामान्यतः वे असली अपराधी को छोड़कर किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठा नहीं फंसाते।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रणजीत पटेल की हत्या के मामले में दायर अपील खारिज करते हुए की। अदालत ने चचेरे भाई की लोहे की रॉड से हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
आरोपी ने तर्क दिया था कि सभी प्रत्यक्षदर्शी मृतक के परिजन थे, इसलिए उनकी गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उसने यह भी कहा कि घटना तड़के 3:30 बजे हुई थी, इसलिए पहचान संभव नहीं थी।
इन दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सभी गवाह घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे और उनके बयानों में कोई बनावट या अतिशयोक्ति नहीं थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रिश्तेदारी मात्र से किसी गवाह की विश्वसनीयता कम नहीं हो जाती।
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी परिवार का करीबी सदस्य था, इसलिए गवाह उसे उसकी आवाज, चाल-ढाल और हाव-भाव से पहचान सकते थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी अभियोजन का मामला पुष्ट होने पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।